लड़ाकू विमान बनाने की तैयारी में है भारत


नई दिल्ली। भारत अब ‘तेजस’ के अलावा भी लड़ावूâ विमानों के निर्माण का इच्छुक है, सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक छह महीने के भीतर वह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, जिसके तहत तय किया जाएगा कि कौन-सा विदेशी विमान निर्माता भारत में इन विमानों को बनाएगा। सूत्रों का कहना है कि ये लड़ावूâ विमान मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) की श्रेणी के होंगे, जबकि ‘तेजस’ एक हल्का, यानी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) है। इस तरह के विमानों को बनाने का पैâसला इसलिए किया जाएगा, क्योंकि इससे न सिर्पâ भारतीय वायुसेना की ़जरूरतें पूरी हो जाएंगी, बाqल्क इन्हें निर्यात भी किया जा सकेगा। दुनियाभर में लड़ावूâ विमान बनाने वाले लगभग आधा दर्जन ही निर्माता हैं, और जिसे भी चुना जाएगा, उसके ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत किसी भारतीय वंâपनी से साझीदारी करने की संभावना है, और वह भारतीय वंâपनी लड़ावूâ विमान प्रोजेक्ट के लिए सरकार की रणनीतिक साझीदार होगी।
अगले २० सालों में भारतीय वायुसेना को ‘तेजस’ के अलावा भी कम से कम २५०-३०० लड़ावूâ विमानों की ़जरूरत पड़ेगी, क्योंकि उसके पुराने विमान धीरे-धीरे डी-कमीशन होते चले जाएंगे। इसी साल जुलाई में वायुसेना एकल-इंजन वाले १२० ‘तेजस’ विमानों को शामिल करेगी, और इसके अलावा भारत प्रâांस से भी ३६ रापेâल लड़ावूâ विमान खरीद रहा है। रक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि मौजूदा विमानों की संख्या को बरकरार रखने के अलावा ’’हमें लड़ावूâ विमानों की संख्या बढ़ाने की भी ़जरूरत है’’। भारतीय वायुसेना को इस समय लड़ावूâ विमानों के ४२ स्क्वाड्रनों की ़जरूरत है, लेकिन फिलहाल उसके पास ३३ स्क्वाड्रन हैं, और यह संख्या अगले कुछ सालों में काफी कम होने जाएगी, जब रूस-र्नििमत मिग-२१ तथा मिग-२७सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद अगले दशक के अंत तक प्रâांस-र्नििमत मिराज २००० और ब्रिटेन-र्नििमत जगुआरविमान भी रिटायरमेंट की कगार पर होंगे। अमेरिका के रक्षामंत्री एश्टन कार्टर की हालिया भारत यात्रा के दौरान भारतीय रक्षामंत्री मनोहर र्पािरकर ने पूछा भी था कि अमेरिकी वंâपनियां किस तरह की तकनीक को भारत के साथ बांट सकती हैं।