रेलवे की बोर्डिंग परिवर्तन की ऑनलाइन सुविधा शुरू


नईदिल्ली । रेलयात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेलवे ने बोा\डग स्टेशन बदलने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की है। अब रिजर्वेशन कराने के बाद इच्छानुसार घर बैठे बोर्डिंग स्टेशन बदल जाएगा। रेलवे के बुिंकग काउंटर से आरक्षण टिकट लेने वालों को जब किसी प्रकार का परिवर्तन करना होता है तो उसे काउंटर पर जाना पड़ता है। लंबी लाइन लगाने के साथ आरक्षण फार्म भरना पड़ता है या आवेदन करना पड़ता है। रेलवे ने ऐसे यात्रियों को १५ फरवरी यानी रविवार की रात १२ बजे के बाद से आनलाइन र्बोिडग बदलने की सुविधा दी है। उदाहरण के लिए कोई यात्री पंजाब मेल से अमृतसर से हावड़ा तक का आरक्षण टिकट कराता है। इसके बाद वह चाहता है कि बिना टिकट निरस्त कराए उसी टिकट पर अंबाला से यात्रा शुरू हो जाए। ऐसे में उसे आवेदन लिखना पड़ता है और स्टेशन अधीक्षक से अनुमति लेने के बाद आरक्षण बुिंकग काउंटर पर जाकर आवेदन जमा करना पड़ता है। तब कहीं र्बोिडग स्टेशन बदल पाता है। र्बोिडग स्टेशन बदलने के बाद टीटीई अमृतसर से ट्रेन चलने के बाद दूसरे यात्री को बर्थ आवंटित नहीं करता है। यात्री का नाम भी अंबाला की आरक्षण सूची में अंकित हो जाता है। इसके लिए यात्री को अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ता है। इसके लिए रेलवे की साइट पर आनलाइन र्बोिडग बदलने की सुविधा शुरू हो रही है। एक टिकट पर एक बार ही र्बोिडग बदली जा सकेगी। र्बोिडग वाले रेलवे स्टेशन द्वारा जारी आरक्षण सूची में यात्री का नाम अंकित होगा। र्बोिडग बदलने पर बीच के स्टेशन का किराया वापस नहीं होगा। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्वâ अधिकारी नीरज शर्मा ने बताया कि इससे काउंटर पर भीड़ भी कम हो जाएगी।

गंदी पटरियों के चलते एनजीटी की रेलवे को फटकार
नई दिल्ली । गंदगी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने रेलवे को फटकार लगाई है। पटरियों पर मानव मल और कचरे के लगे ढेरों को लेकर एनजीटी ने दिल्ली में मौजूद प्राधिकरणों को भी निर्देश दिए हैं कि वे पटरियों के पास बनी झुग्गी बाqस्तयों के पुनर्वास पर जल्द पैâसला लें। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायर्मूित स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को उक्त आशय के निर्देश दिए हैं।
एनजीटी ने सख्त लहजे में रेलवे प्रशासन से कहा है कि वह पटरियों पर मल त्यागने वालों और कचरा पेंâकने वालों पर ५००० रुपये तक का जुर्माना लगाए और उनके साथ सख्ती से पेश आए। रेल पटरियों की गंदगी पर टिप्पणी करते हुए एनजीटी ने कहा कि ‘आप राजधानी में १५ किलोमीटर तक की पटरी को भी साफ नहीं रख सकते। यदि आप पटरियों के साफ होने का दावा करते हैं तो फिर वहां कचरा वैâसे आ सकता है? हम निगमों समेत सभी प्राधिकरणों को ये निर्देश देते हैं कि वे पूरा सहयोग करें और यह सुनिाqश्चत करें कि रेल पटरियां साफ हों, उन पर कोई कचरा न हो।’ इसके साथ ही एनजीटी ने कहा कि पटरियों के आस-पास गंदा पानी भी जमा नहीं होना चाहिए। सुनवाई की अगली तारीख ३० मार्च से पहले साफ-सफाई संबंधी रिपोर्ट जमा कराने की भी हिदायत संबंधितों को दी गई है। इसके साथ ही पीठ ने इन्हें निर्देश दिया कि वे इन झुग्गी बाqस्तयों को नई जगह बसाने से जुड़ी पूरी कार्य योजना जमा कराएं. पीठ ने कहा कि दिल्ली विकास प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, रेलवे को डीयूएसआईबी के साथ मिलकर दो सप्ताह के भीतर बैठक आयोजित करनी चाहिए। पटरियों के पास बनी झुाqग्गयों को स्थानांतरित करने के संदर्भ में पूरी कार्य योजना न्यायाधिकरण के सामने जमा करवानी चाहिए। झुाqग्ग्यों को स्थानांतरित करने के लिए उन्हें वैकाqल्पक आवास उपलब्ध करवाया जाना चाहिए। पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह झुाqग्ग्यों के पुनर्वास के लिए ११ करोड़ रुपये की उस राशि का उपयोग करे, जो उसके पास वर्ष २००३ से जमा है। न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि वह झुग्गी बाqस्तयों के पास उन स्थानों पर शौचालयों का निर्माण तेजी से कराए, जिन पर पहले ही रेलवे की ओर से मंजूरी दी जा चुकी है। इस प्रकार पीठ ने एक बार फिर रेल्वे को और संबंधितों को गंदगी दूर करने और बेहतर विकल्प तलाशने के लिए कहा है।

ऑनलाइन कबाड़ नीलामी से रेलवे को मिले ३ हजार करोड़ रु.
नईदिल्ली। रेलवे ने डिजिटल इंडिया के तहत कबाड़ नीलामी के लिए ऑनलाइन ई नीलामी को अनिवार्य कर दिया है। इसी तारतम्य में भारतीय रेलवे ने कबाड़ की ऑनलाइन नीलामी से पिछले वित्त वर्ष में ३,००० करोड़ रुपए अर्जित किया है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने कबाड़ की नीलामी के लिए १०० फीसदी ई-नीलामी को लागू किया है। ई नीलामी से २०१४-१५ में ३००० करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई। ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत संभावित कबाड़ व्रेâताओं को अखिल भारतीय स्तर पर साथ साथ बोली लगानी होती है। रेलवे हर साल सार्वजनिक नीलामी के जरिये हजारों टन कबाड़ बेचती है जिसमें १५,००० वैगन, १,२०० कोच, ८०-१०० लोकोमोटिव शामिल हैं। इससे पहले कबाड़ की नीलामी खुली बोली के जरिये होती थी लेकिन ऐसे में माफिया की भूमिका को खारिज नहीं किया जा सकता।