रेलवे की धुलाई में हर माह करोणों का भ्रष्टाचार


– मुंह पोंछने वाली टावल की धुलाई २.२५ रूपया
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का बोल-बाला है। एकाधिकार के बल पर रेल्वे अपने यात्रियों को दोनों हाथों से लूटती है। उसके बाद भी रेल्वे आर्थिक बदहाली का शिकार है। निर्माण कार्यों से लेकर यात्रियों की खान-पान सुविधा, अन्य सुविधाओं के नाम पर जिस तरह भ्रष्टाचार और रिश्वत खोरी है। उसके कारण रेल्वे बोर्ड, आईआरटीसी तथा रेल्वे के मंत्री और अधिकारी पिछले कई वर्षों से चर्चा में बने हुए है।
हाल ही में रेल मंत्री मनोज सिंहा ने राज्यसभा में लिखित जानकारी देते हुए बताया कि रेल्वे एक बेड की धुलाई ६ रूपया पेâस टावल की धुलाई २.२५ रूपया तकिया कवर ६ रूपया तथा कम्बल की धुलाई का २५ रूपया देती है।
दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई, बैंगलोर, भोपाल इंदौर जैसे दर्जनों स्टेशनों में बड़े रोल के विभिन्न आयटमों की धुलाई में करोणों रूपया महीना का अवैध लेनदेन होता है। इसके मनमाने तरीके से टेंडर दिए जाते है। इसमें रेल्वे के अधिकारियों का भारी कमीशन होता है।
– टेंडर सार्वजनिक क्यों नहीं
रेल्वे खाने-पीने के हजारों आयटम स्टेशनों में बिकने के लिए स्वीकृत करता है। इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है। घटिया माल स्टेशनों पर ब्रांडेड कम्पनियों के माल से ज्यादा कीमत में बिकता है। वेंडर भी निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलता है। रेल्वे अधिकारियों की मिली भगत से यह गोरखधंधा वर्षों से चल रहा है।
– सरकार को नहीं दिखता रेल्वे का भ्रष्टाचार
प्रतिदिन लाखों यात्री रेल्वे में व्याप्त भ्रष्टाचार और रिश्वत खोरी के शिकार होकर अपनी शिकायतें दर्ज कराते है। इसके बाद भी घटिया गंदे बेड एसी के यात्रियों को मिलते है। इसी तरह स्टेशनों और पेंट्रीकारों में घटिया खाने पीने की चीजें महंगे दामों में खुले आम बिक रही है। रिश्वत और भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरे हो चुकी है, कि ठेकेदारों और सप्लायरों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। कोई मामला कभी तूल पकड़ता है तो जुर्माना करके अथवा नाम बदलकर पुनः ठेका हथिया लेता है। सूत्रों की माने तो रेल्वे में अरबों रूपया प्रतिमाह का अवैध लेनदेन हो रहा है। इससे रेल्वे को अरबों रूपया प्रतिमाह का नुकसान उठाना पड़ता है।