रेंकोजी मंदिर में रखी हैं नेताजी की अस्थियां


नयी दिल्ली। तत्कालीन मनमोहन िंसह सरकार ने स्वीकार किया था कि जापान के रेंकोजी मंदिर में रखी आqस्थयां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हैं। कल सार्वजनिक की गई फाईलों के अनुसार मंदिर के पुजारी के यह संकेत मिलने के बाद कि नेताजी के अवशेषों को वहां सम्मान के साथ संरक्षित नहीं रखा जा सकता, भारतीय राजदूत को वे आqस्थयां भारतीय दूतावास की नवर्नििमत इमारत में लाने के निर्देश भी दिया था। विदेश मंत्रालय की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन को दिये गए जवाब में उक्ताशय का खुलासा हुआ है। मंत्रालय को नेताजी की आqस्थयों को वापस लाने के लिए जांच पड़ताल करने को कहा था। िंसह ने सात दिसंबर २००६ को तत्कालीन लोकसभा सांसद सुब्रत बोस द्वारा इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखे जाने बाद विदेश मंत्रालय को इसकी जांच करने को कहा था। सुब्रत बोस ने कहा था कि अनगिनत भारतीयों का मानना है कि जापानी मंदिर में रखी आqस्थयां नेताजी की नहीं हैं उन्होंने मंदिर से नेताजी की आqस्थयां भारत लाने के सरकार के किसी भी पैâसले का पुरजोर विरोध करने की चेतावनी दी थी।
अपने जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत सरकार ने स्वीकार किया है कि जापान के रेंकोजी मंदिर में मौजूद आqस्थयां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की हैं।
मंत्रालय ने तब सैद्धांतिक रूप से पैâसला किया कि नेताजी की आqस्थयों को तोक्यो में निर्माणाधीन भारतीय दूतावास की नयी इमारत में उचित स्थान पर रखा जाए। उसने यह भी कहा था कि भारत के राजदूत को नवर्नििमत इमारत में आqस्थयां स्थानांतरित किए जाने के लिए समुचित तौर तरीकों पर काम करने के निर्देश भी दिये गए थे। विदेश मंत्रालय जापान सरकार और मंदिर के प्राधिकारियों के दबाव में था और उसने न केवल िंसह सरकार को बाqल्क पहले भी नेताजी के अवशेषों को वापस लाने के लिए पत्र लिखा थ