रिजर्व बैंक गवर्नर पद की दौड़ में कौशिक बासु


-नये गवर्नर पर मुद्रााqस्फति नियंत्रण पर निवेशकों की कड़ी नजर की चुनौती
नईदिल्ली। र्आिथक मंदी की भविष्यवाणी करने वाले रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के उत्तराधिकारी की खोज में वेंâद्र सरकार किसी भी तरह की जल्दी में नहीं है। एक सूत्र ने बताया कि रघुराम राजन अगले महीने अपनी अंतिम नीतिगत बैठक लेंगे और उसी के बाद उनके उत्तराधिकारी की घोषणा होगी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि ४ सितंबर को रघुराम राजन का कार्यकाल खत्म हो रहा है और उनके उत्तराधिकारी के रूप में जिन नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया है उनमें कौशिक बासु का नाम भी है। बता दें कि कौशिक बासु विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री रहे हैं। ज्ञात हो कि रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले ही महीने साफ कर दिया था कि वे दूसरा कार्यकाल नहीं चाहते हैं। निवेशकों के बीच राजन की छवि रॉक-स्टार की है। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के इस पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने २००८ की र्आिथक मंदी की भविष्यवाणी काफी पहले ही कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर र्उिजत पटेल, पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण और भारतीय स्टेट बैंक की अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य अब भी गवर्नर पद की रेस में बने हुए हैं। रघुराम राजन के बाद गवर्नर के पद पर चाहे जो भी आए मुद्रााqस्फति पर नियंत्रण पाने के लिए उस पर निवेशकों की कड़ी नजर रहेगी। सूत्रों के अनुसार कौशिक बासु का विश्व बैंक के साथ कार्यकाल ३१ जुलाई को खत्म हो रहा है और वे रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद के लिए मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि इसमें कुछ राजनीतिक दिक्कतें भी पेश आ सकती हैं। जैसे कौशिक बासु ने पिछली यूपीए सरकार के लिए मुख्य र्आिथक सलाहकार के तौर पर काम किया है और वे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन के मार्गदर्शन में अध्ययन कर चुके हैं। बता दें कि २०१४ के आम चुनाव में अमत्र्य सेन ने प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी का विरोध किया था। रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन भी इस दौड़ में शामिल रहे हैं। हालांकि उनके करीबी सूत्रों के अनुसार वे खुद गवर्नर के पद के लिए अनिच्छुक हैं। ६८ वर्षीय मोहन गवर्नर पद की दौड़ में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति हैं। वे हाल ही में येले यूनिर्विसटी में पद लेने के लिए अमेरिका जा चुके हैं।