राहुल गांधी होंगे नये कांग्रेसाध्यक्ष


० सोनिया गांधी के वफादारों ने डाले हथियार
० अहमद पटेल और दिग्गी राजा हुए मजबूत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कोपभवन में जाने के बाद कांग्रेस के आंतरिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। पुत्रमोह में सोनिया गांधी ने पुत्र के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार के निष्ठावान नेताओं ने भी राहुल गांधी के पक्ष में अपने आपको समर्पित कर दिया है। इसके साथ ही नाराज राहुल गांधी को कोपभवन से बाहर निकालकर उनकी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप मेंं ताजपोशी की तैयारियां कांग्रेस में शुरू हो गई हैं। इस बदलाव में कांग्रेस के शीर्ष नेता अहमद पटेल तथा महासचिव दिग्विजय सिंह की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर सत्ता का मुख्य वेंâद्र बिन्दु बनाने की वकालत के बाद कांग्रेस में राहुल युग की शुरूआत हो रही है। राहुल गांधी के सारथी के रूप में अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया महत्वपूूर्ण भूमिका में होंगे। वहीं दिल्ली में भविष्य की चिंता में लगे कांग्रेसी नेता वफादारी बदलने की राह पर हैं। पार्टी के कुछ नेताओं ने मुखर होकर बदलाव के सुर में सुर मिलाने शुरू कर दिये हैं।
कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी से मिलकर बदलाव को स्वीकार कर लेने की सलाह दी है। इस बीच सोनिया गांधी भी बदले हालात को देख राहुल की ताजपोशी के लिए राजी हो गई हैं। अब तक के सबसे लंबे अध्यक्ष के कार्यकाल को सोनिया गांधी मार्च में प्रस्तावित पार्टी अधिवेशन में विराम देंगी। इसके साथ ही कांग्रेस में राहुल गांधी युग शुरू हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी के कई करीबी नेताओं ने उनसे बदलाव के लिए सही वक्त की ओर इशारा करते हुए राहुल को कमान देने की बात कही है जबकि दिग्विजय सिंह व कमलनाथ जैसे नेताओं ने तो सार्वजनिक रूप से सोनिया गांधी से पद छोड़ देने की वकालत की है। जानकारी के अनुसार सोनिया की इस हां के बाद ही राहुल नई कांग्रेस की टीम बनाने के लिए अज्ञातवास पर चले गये हैं।
राहुल के करीबी नेताओं के अनुसार कांग्रेस अधिवेशन से पहले पार्टी कार्यसमिति की बैठक होगी। बैठक में राहुल के भविष्य की कांग्रेस का खाका खींचेंगे। इसके बाद पार्टी के पुनर्गठन के लिए कामकाज प्लान की तर्ज पर सामूहिक इस्तीपेâ के बाद पार्टी का पुनर्गठन होगा। अधिवेशन में पार्टी के संविधान में कई अहम बदलाव के साथ अध्यक्ष सहित महासचिवों के कार्यकाल को तीन साल का करवा, वर्ष में दो बार कांग्रेस अधिवेशन बुलाना जैसे पुराने नियमों की वापसी होगी।