राज्य जीएसटी पर राजी, सीएसटी का बकाया मांगा


नई दिल्ली । प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कांग्रेस के विरोध के चलते भले ही संसद में अटका हुआ हो लेकिन राज्य सरकारें इसे हरी झंडी दिखाने को तैयार हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ बजट-पूर्व चर्चा के दौरान राज्यों ने शनिवार को कहा कि वे जीएसटी लागू करने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें राजस्व की हानि नहीं हो। इस बीच राज्यों ने वेंâद्र सरकार से वेंâद्रीय बिक्री कर (सीएसटी) के बकाया के भुगतान की मांग भी की है।
आम बजट २०१६-१७ के संबंध में राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक के बाद पाqश्चम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि हम जीएसटी के समर्थन में हैं लेकिन सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि राज्यों का राजस्व प्रभावित न हो। उन्होंने जीएसटी परिषद में वेंâद्र की भूमिका २५ प्रतिशत तथा राज्यों की ७५ प्रतिशत रखने का सुझाव भी दिया।
बैठक के दौरान कई राज्यों ने वेंâद्र पर बकाया सीएसटी के भुगतान की मांग भी की। उड़ीसा के वित्त मंत्री प्रदीप कुमार अमट ने कहा कि वेंâद्र सरकार को आम बजट २०१६-१७ के माध्यम से राज्यों को सीएसटी की क्षतिर्पूित का भुगतान करना चाहिए।
पंजाब, उत्तर प्रदेश, असम, तेलंगाना और पाqश्चम बंगाल ने भी उड़ीसा की मांग में अपना सुर मिलाया। उत्तर प्रदेश का वेंâद्र पर सीएसटी का २७०० करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। यह जीएसटी लागू होने से पहले सीएसटी की दरें कम करने के चलते हुआ है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से बैठक में शामिल हुए राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र बाजपेयी ने कहा कि राज्य ने २००७-०८ से २०१२-१३ के दौरान हुई राजस्व हानि का दावा वेंâद्र के पास भेजा था। इसमें से २०१०-११ तक के दावे का निस्तारण किया गया है जबकि वित्त वर्ष २०११-१२ के १३९२ करोड़ रुपये तथा २०१२-१३ के १३१९ करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। सरकार को इसका भुगतान शीघ्र करना चाहिए।पंजाब के वित्त मंत्री एस परिंमदर िंसह ढींढसा ने भी कहा कि सरकार को आम बजट २०१६-१७ में सीएसटी की क्षतिर्पूित का भुगतान करना चाहिए।
राजस्थान के नगरीय विकास मंत्री राजपाल िंसह शेखावत ने भी जीएसटी लागू होने तक सीएसटी की ३५०० करोड़ रुपये की भरपाई करने की मांग भी की। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के प्रतिनिधि ने भी बैठक में सीएसटी क्षतिर्पूित को जारी करने की मांग उठाई। उन्होंने वेंâद्र से राज्य सरकार की उधार लेने की सीमा बढ़ाने की मांग भी की।
चौदहवें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि जो राज्य राजकोषीय अनुशासन का पालन करते हैं उन्हें उनके राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साढ़े तीन प्रतिशत के बराबर उधार लेने की अनुमति दी जाए। फिलहाल राज्य सिर्पâ जीएसटी का तीन प्रतिशत ही ऋण ले सकते हैं।