राज्यसभा में बीमा बिल को कांग्रेस का समर्थन तय


– मोदी सरकार को संसद में मिला फ्लोर मैनेजमेंट का फायदा
नईदिल्ली। र्आिथक सुधार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत एनडीए सरकार को संसद में फ्लोर मैनेजमेंट में बड़ी सफलता मिली है। कांग्रेस बीमा (संशोधन) बिल को राज्यसभा में समर्थन देने के लिए तैयार हो गई है, जिसमें एफडीआई की सीमा बढ़ाकर २६ से ४९फीसदी करने का प्रस्ताव है। यह बिल अब गुरूवार को ही पास होने की उम्मीद है। इसके अलावा सरकार दो अन्य बिलों- खान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) संशोधन बिल, २०१५ और कोयला खदान (विशेष प्रावधान) बिल, २०१५ को राज्यसभा की सिलेक्ट कमिटियों के हवाले करने की विपक्षी मांग पर सरकार सहमत हो गई। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस, लेफ्ट, तृणमूल कांग्रेस और बाकी विपक्षी र्पािटयां अब बीमा बिल को सिलेक्ट कमिटी के हवाले करने की मांग नहीं करेंगी। वामदल के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘संसद के शीतकालीन सत्र में बीमा बिल पहले ही सिलेक्ट कमिटी के पास भेजा जा चुका है। कमिटी की सिफारिशों को बिल में शामिल किया गया है। लिहाजा, इसे फिर से सिलेक्ट कमेटी को भेजे जाने का कोई औचित्य नहीं है।’ लोकसभा पहले इस बिल को पास कर चुकी है और राज्यसभा में इसका पास होना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए अहम सफलता होगी। सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह बीमा और रक्षा समेत तमाम सेक्टरों में विदेश निवेश को प्रोत्साहित करना चाहती है।
सरकार को सफलता इस मामले में भी मिली है कि खान और कोयला बिलों को सिलेक्ट कमिटियों के पास १८ मार्च तक की डेडलाइन के साथ भेजा गया है। इससे सरकार को बजट सत्र के २० मार्च से शुरू होने वाले एक महीने के ब्रेक से पहले दोनों बिलों को पास कराने का विकल्प भी मौजूदा होगा। हालांकि, इस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है कि संसद सत्र के ब्रेक को एक-दो दिन के लिए आगे बढ़ा दिया जाए। मोदी सरकार ने इस पर फिलहाल कोई पैâसला नहीं लिया है। बिलों के लिए तय समयसीमा को सरकार की जीत के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि कई मामलों में सिलेक्ट कमिटियों ने अपने सुझाव देने में दो-दो साल तक लगा दिए हैं।
संसदीय कार्यमंत्री वेंवैâया नायडू ने इसका श्रेय विपक्ष के सहयोग को दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ऐसा बीजेडी, तृणमूल कांग्रेस, एआईएडीएमके, एसपी और बीएसपी जैसी क्षेत्रीय र्पािटयों के रुख की वजह से हो पाया है। तृणमूल और बीजेडी कोयला बिल को जल्द पास होते देखना चाहती हैं, जबकि एसपी, बीएसपी और जेड(यू) ने इस सुझाव का समर्थन किया कि दोनों सिलेक्ट कमिटियों के लिए तय समयसीमा दी जाए। दोनों कमिटियों में १९-१९ सदस्य होंगे। खान एवं खनिज संशोधन बिल से जुड़ी कमिटी की अगुवाई भाजपा सांसद भूिंपदर यादव करेंगे। बाकी सदस्यों में तरुण विजय (भाजपा), शांताराम नाइक और मणिशंकर अय्यर (कांग्रेस), के टी एस तुलसी (नॉमिनेटेड), पवन कुमार वर्मा (जेडी(यू)), रवि प्रकाश वर्मा (एसपी) आदि शामिल हैं। कोयला खदान बिल, २०१५ पर बनी सिलेक्ट कमिटी के हेड भाजपा सांसद अनिल माधव दवे होंगे। बाकी मेंबरों में वी पी िंसह भडनोर (भाजपा), दिाqग्वजय िंसह, पी भट्टाचार्य, राजीव शुक्ला (कांग्रेस), नरेश अग्रवाल (एसपी), के सी त्यागी (जेडी(यू)), नरेंद्र कुमार कश्यप (बीएसपी) आदि शामिल हैं। दोनों सिलेक्ट कमेटियों को १८ मार्च तक रिपोर्ट सौंपनी है। विपक्ष की मांग स्वीकार किए जाने के बाद राज्यसभा में बुधवार को बिना किसी व्यवधान के कामकाज हुआ। मोटर वीइकल्स (संशोधन ऐक्ट) बिल, २०१५ आम सहमति से पास हुआ। सरकार और विपक्ष दोनों पक्षों ने सदन की कार्यवाही चलाने में भरपूर सहयोग दिखाया, जिससे डिप्टी चेयरपर्सन पी जे कुरियन को कहना पड़ा कि नियमित तौर पर ऐसा ही होना चाहिए। सरकार की अगली चुनौती यह होगी कि सिलेक्ट कमिटी इन माइंस और कोल बिलों में किसी अहम संशोधन की सिफारिश नहीं करे।