राजस्थान में जुटेंगे पर्यावरण प्रेमी


भोपाल। पर्यावरण प्रेमी इस महीने राजस्थान में एक मंच पर होंगे। दरअसल, विकास की दौड़ में पर्यावरण की हो रही अनदेखी को लेकर यह विशेषज्ञ अपने-अपने विचार रखेंगे। आयोजन भीकमपुरा में होगा जो एक सप्ताह तक चलेगा।
जानकारी के अनुसार इस दौरान पर्यावरण प्रेमी जमा बाढ़ और सुखाड़ के साथ विकास के नाम पर होने वाले विनाश को रोकने की रणनीति बनाने का भी काम करेंगे। जल-जन जोड़ो अभियान के तहत राजस्थान के अलवर जिले के भीकमपुरा में ाqस्थत तरुण भारत संघ के आश्रम में सात से १४ अप्रैल तक पर्यावरणीय व सामाजिक न्याय प्रशिक्षण शिविर होगा। इसमें जलपुरुष राजेंद्र िंसह और एकता परिषद के पी.वी. राजगोपाल की अहम भूमिका है। राजेन्द्र सिंह ने बताया कि इस शिविर में आने वाले प्रतिनिधियों में वैचारिक और मत भिन्नता हो सकती है, मगर सभी मतैक्य होकर इस चुनौती के मुकाबले की लिए एक रोड मैप बनाएंगे। राजेंद्र िंसह ने आगे कहा कि संकट की जनक विकास नीति है, मगर कोई भी लोकतांत्रिक सरकार इस दिशा में विचार नहीं कर रही है। विस्थापन, सूखा व बाढ़ के कारण समुदाय त्रस्त है, विकृति और विनाश जगजाहिर है, इसलिए देश में कई छोटे और बड़े आंदोलन हो रहे हैं। ये आंदोलन विकास के नाम पर विनाश को रोकने के लिए चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास जनित विनाश व जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को रोकने में सक्षम और इसके संरक्षण व संवर्धन में सक्षम लोगों के साथ और सामाजिक-र्आिथक बराबरी की एक समझ रखने वाले लोगों को आगे आना पड़ेगा। ऐसे लोगों को आगे लाने वाले के लिए भारत में बहुत से किसान संगठन, मजदूर यूनियन, दलित व महिला संगठन तथा गैर सरकारी संगठन सक्रिय हैं।
जलपुरुष ने आगे कहा कि देश में एकता परिषद, जलबिरादारी, राष्ट्रीय आंदोलनों का समन्वय, नवदान्य, मजदूर किसान शक्ति संगठन और अन्य सैकड़ों संगठन के कार्यकर्ता इस कार्य में लगे हैं। इन संगठनों से जुड़े लोग भीकमपुरा शिविर में हिस्सा लेने वाले हैं। इस शिविर का ब्योरा देते हुए हुए राजेंद्र िंसह ने बताया कि शिविर में जलवायु परिवर्तन क्या है, यह क्यों, वैâसे, कब होता है, इस पर चर्चा होगी। दलित, आदिवासी और महिला आंदालनों में पर्यावरण की समझ क्यों जरूरी है और इस सब में संगठनों और आंदोलनों की जिम्मेदारी और भागीदारी को वैâसे सुनिाqश्चत कर सकते हैं, यह विचार किया जाएगा। इसके बाद एक कार्ययोजना भी सामने लाई जाएगी। भीकमपुरा शिविर में विभिन्न संगठनों, आंदोलनों, विभिन्न विचारधारा, दल, हर वर्ग और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। इस शिविर में प्रथम पंक्ति का नेतृत्व दूसरी पंक्ति को प्रशिक्षण देगा।