राजपक्षे की ‘ब्लैक मनी’ का पता लगाने मांगी भारत की मदद


नईदिल्ली। पूर्ववर्ती राजपक्षे शासन द्वारा कथित रूप से विदेश में छिपाई ५ अरब डॉलर से ज्यादा की रकम का पता लगाने में श्रीलंका की नई सरकार ने भारत सरकार से मदद मांगी है। इस मामले में भारत एक फाइनैंस इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) बनाने में श्रीलंका की मदद करेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना करप्शन पर काबू पाने और मिंहदा राजपक्षे के शासन द्वारा विदेश में कथित तौर पर छिपाई गई रकम को वापस लाने के अपने चुनावी वादे पूरे करने के कदम उठा रहे हैं। राजपक्षे ने एक दशक तक श्रीलंका में शासन किया था। एफआईयू बनाने में मदद मांगने के लिए सिरीसेना सरकार ने अनौपचारिक रूप से नरेंद्र मोदी सरकार से संपर्वâ किया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक औपचारिक प्रस्ताव जल्द आ सकता है। वित्त मंत्रालय यह यूनिट बनाने में मदद करेगी। इसे इंडियन इकाई की तर्ज पर बनाया जा सकता है।
एक अधिकारी का कहना है कि हम श्रीलंका को एफआईयू बनाने में मदद दे सकते हैं। भारत ने नवंबर २००४ में एफआईयू बनाई थी। संदिग्ध फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस से जुड़ी सूचनाएं हासिल करने, उनकी प्रोसिसंग और अनालिसिस के संबंध में यह नैशनल एजेंसी है। यह मनी लॉउंडिंरग और इससे जुड़े अपराधों से निपटने के वैश्विक प्रयासों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया, जांच और प्रवर्तन एजेंसियों से को-र्ऑिडनेट करती है। पिछले साल नवंबर में एफआईयू-इंडिया और इसकी समकक्ष ऑस्ट्रेलियाई यूनिट ने इंटरनैशनल फाइनैंशल क्राइम्स के खिलाफ मिलकर काम करने का निर्णय किया था। इंडिया श्रीलंका के उस औपचारिक अनुरोध पर भी विचार करेगा, जिसमें टैक्स हेवेन माने जाने वाले देशों में कथित तौर पर छिपाई गई रकम का पता लगाने में आरबीआई से मदद दिलाने को कहा है। सिरीसेना सरकार ने वल्र्ड बैंक और इंटरनैशनल मॉनेटरी पंâड्स से भी इस संबंध में मदद मांगी है। श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री और वैâबिनेट के प्रवक्ता रजिता सेनारत्ने के मुताबिक, उनके देश के पास इसकी क्षमता नहीं है। ८ जनवरी को हुए चुनाव में राजपक्षे को हराने वाले सिरीसेना ने आरोप लगाया है कि पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी खजाने से ५.३८ अरब डॉलर की हेरपेâर की। श्रीलंका सरकार की माने तो राजपक्षे की हार का एक बड़ा कारण ऊंचे पदों पर बैठे लोगों का भ्रष्टाचार भी था। राजपक्षे के परिवार के कई लोग मंत्री थे और सरकारी निगमों में ऊंचे पदों पर थे।
आरोप लगाया है कि पिछली सरकार ने कई रेगुलेटर्स को निाqष्क्रय कर दिया था। नई सरकार अब इनके सहित दूसरे सरकारी संस्थानों को सक्रिय कर रही है। श्रीलंका की ऐंटी-करप्शन इकाई ने अपने वेंâद्रीय बैंक के फॉर्मर गवर्नर निवार्ड वैâब्राल और राजपक्षे के करीबी सहयोगी सजिन डी वास गुणवद्र्धने की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी है।