राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत की कांग्रेस में अनदेखी


नई दिल्ली। राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भले ही नरेंद्र मोदी और नीतिश व लालू को जीत दिलवाने में जबरदस्त रोल अदा किया हो, लेकिन सुनने में आ रहा है कि कांग्रेस उनकी अनदेखी कर रही है। बताया जाता है कि किशोर के आइडिया कांग्रेस कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर पा रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी अभी तक यूपी में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाई है। एक तरफ मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए शंखनाद कर दिया है तो दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में अभी तक चुनावी मुद्दे तक तय नहीं हो सके हैं। यहां कांग्रेस की बैठकों में आपसी खींचतान भी सामने आ रही है। इसलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने उप्र विधानसभा चुनावों को ध्यान में रख प्रशांत किशोर को रणनीति का जिम्मा तो सौंप दिया लेकिन पार्टी उनके आइडिया पचा नहीं पा रही है। प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने और प्रियंका वाड्रा को चुनावी वैंâपेन लीड करने का सुझाव दिया था। लेकिन उनके इन आइडिया को साइडलाइन कर दिया गया। किशोर ने पार्टी के राज्य प्रमुख निर्मल खत्री की जगह किसी ब्राह्मण नेता को पार्टी प्रमुख बनाने का सुझाव दिया था। लेकिन कांग्रेस के उत्तर प्रदेश महासचिव मधुसूदन मिस्त्री ने इस सुझाव का यह कहकर विरोध किया कि अब नया चेहरा लाने के लिए बहुत कम समय बचा है क्योंकि २०१७ में ही चुनाव होने हैं।