यूपी सरकार के 8458 करोड़ का अता-पता नही


लखनऊ।  उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी वंâपनियों, संस्थाओं और समितियों में किए अंश पूंजी निवेश के ८४५८ करोड़ रुपये का हिसाब-किताब नहीं मिल पा रहा है। सीएजी ने इाqक्वटी, निगमों, सरकारी वंâपनियों और सरकारी समितियों में किए गए सरकारी निवेश में गड़बड़ी पाई। सीएजी को बजट के कम खर्च, साल के आखिर में तेजी से किए गए खर्च की भी जानकारी मिली। इन सभी पर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट दी। सीएजी ने पाया है कि सरकार ने कुल १३५८१ संस्थाओं में ३१ मार्च, २०१४ तक किए गए करीब ६०९२५ करोड़ के निवेश में केवल ५२४६६ करोड़ के निवेश की ही जानकारी दी। संस्थाओं के एकाउंट में दिखाए गए निवेश से वास्तविक निवेश में करीब ८४५८ करोड़ के निवेश का मिलान नहीं हो पा रहा था। यही नहीं सरकार ने कर्मचारियों और अफसरों को दिए गए कर्ज और एडवांस में भी अभिलेखों का ठीक से मिलान नहीं किया गया। इससे करीब ४.५ हजार करोड़ रू की राशि का पता नहीं चला। सरकार द्वारा दिए गए ऋण की राशि १२२४३ में ४३५३ करोड़ की राशि का मिलान कागजों में नहीं मिल सका। सीएजी ने यह भी पाया कि सरकारी विभागों को जिस मद में पेंशन की धनराशि जमा करनी चाहिए थी, उसमें नहीं किया गया।
० आखिर में खर्च किया ज्यादा
सीएजी ने यह भी पाया कि वर्ष २०१३-१४ के दौरान पूरे राजस्व व्यय का २३.३७ फीसदी और पूरे पूंजीगत व्यय का ५० फीसदी से ज्यादा केवल मार्च के महीने में ही खर्च किया गया। बाकी पूरे साल तक इन दोनों मदों में धनराशि खर्च ही नहीं की जा सकी। सरकार के कई विभाग अनुपूरक बजट को ही खर्च नहीं कर पाए। दरअसल अनूपूरक बजट का प्रावधान तब किया जाता है जब मूल बजट कम हो या बजट की कमी रहने की आशंका हो। सरकार ने १०७३२ करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया था। इनमें से ३१५२ करोड़ खर्च ही नहीं किया जा सका जो कुल अनुपूरक बजट का २९.३७ फीसदी था।