मोदी की डिग्री की होगी जाँच


नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी का डिग्री विवाद एकबार फिर खबरों में आ गया है। इसबार केंद्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए हैं कि वह 1978 का बीए का रिकॉर्ड दिखाए। इसी साल पीएम नरेंद्र मोदी की बीए प्रोग्राम की डिग्री बताई जा रही है। पहली बार पीएम का डिग्री मामला तब चर्चा में आया जब आम आदमी पार्टी संयोजक अरविद केजरीवाल ने पिछले साल अप्रैल में उनकी बीए की डिग्री को फर्जी बताया था। उस वक्त दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने सामने आकर कहा था कि हमने रिकॉर्ड चेक किए हैं। पीएम की डिग्री असली है। इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी प्रेस कांफ्रेंस में पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की जनसंपर्क अधिकारी मीनाक्षी सहाय से रिकॉर्ड की जाँच करने के निर्देश दिए। उन्होंने मीनाक्षी की इस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था यह थर्ड पार्टी इंफार्मेशन है। सूचना आयोग ने कहा कि इस दलील में कोई दम नहीं है। सीआईसी ने 1978 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी विद्यार्थियों के रोल नंबर, नाम, पिता का नाम, प्राप्तांक समेत सभी सूचनाएं देखने और इनसे संबंधित रजिस्टर की संबंधित पेज का प्रामाणिक कॉपी मुफ्त में उपलब्ध कराने का आदेश दिया। आरटीआई कार्यकर्ता नीरज ने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1978 में बीए के रिकॉर्ड माँगे थे जिसे विश्वविद्यालय ने देने से मना कर दिया था। लेकिन केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि इससे कौन सी निजता का हनन होता है। मीनाक्षी सहाय की एक और दलील थी कि बीए प्रोग्राम में दो लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। जब तक मांगी गई सूचना और प्रोग्राम के विषय का जिक्र नहीं दिया जाएगा तक तक जानकारी देना मुश्किल होगा। 1978 का परीक्षा परिणाम स्वरूप में भी नहीं है। केंद्रीय सूचना आयोग ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।