मोदी की कथनी-करनी में अंतर


– जनहितकारी योजनाओं के बजट में भारी कटौती
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ सुराज, लाने की बात करते है तो दूसरी तरफ पछले दरवाजे से पूर्ववर्ती सरकार की जनहितकारी योजनाओं के खर्च में कटौती करते जा रहे है। मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान, एकीकृत बाल विकास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना, सर्व शिक्षा अभियान समेत अन्य योजनाओं के बजट में कटौती कर दी है। सरकार की इस कटौती के पीछे मंशा क्या है इसका खुलासा भी नहीं किया गया है। लेकि विशेषज्ञ इसे सरकार की खस्ताहाल हालत बता रहे है। विपक्ष भी इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में है। नरेंद्र मोदी की प्रिय योजना स्वच्छ भारत अभियान के लिए २०१५-१६ के दौरान ६३५ करोड़ रूपये की कटौत्ी की गई है। जबकि आंगनवाड़ी में कुपोषित बच्चों के लिए एकीकृत बाल विकास योजना में बहुत अधक ९८५८ करोड़ रूपये की कमी की गई है। जो कि पिछले साल के बजट १७८५८ करोड़ रूपये की तुलना में आधा से कम है। आईसीडीएस पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की महत्वकांक्षी योजना थी। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के फण्ड को भी घटा दिया है। योजना के फण्ड में ८३९० करोड़ रूपये की कमी की गई है। सर्वशिक्षा अभियान के आवंटन में पिछले साल के ९१९३.७५ करोड़ रूपये को केवल २००० करोड़ रूपये कर दिया गया है। इस तरीके से फण्ड में कटौती की पहले ने कांग्रेस को मोदी सरकार को घेरने का मौका दे दिया है। अधिकांश योजनाएं या तो ग्रामीण विकास के लिए है अथवा पीड़ित वर्ग के लोगों के लिए है। भूमिअधिग्रहण बिल के विरोध में कांग्रेस को मिल रहे समर्थन को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा सतर्वâता के साथ कदम उठाने का प्रयास करेगी।