मुंबई में मणिपुरी युवती के साथ बदसलूकी


– अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रही मुंबई
मुंबई। एक जमाना था जब मुंबई महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित महानगर माना जाता था मगर कुछ सालों के दरम्यान जिस प्रकार से मुंबई शहर या उपनगरों में महिलाओं के साथ आपराधिक मामलों में बेतहाशा वृद्धि देखने-सुनने को मिल रही है उससे यही कहा जा सकता है कि महिलाओं के लिए अब मायानगरी मुंबई सुरक्षित नहीं रह गई है। क्योंकि कानून का खौफ ही नहीं है। हो भी तो वैâसे कानून पर राजनीति जो भारी पड़ने लगी है। इसी कड़ी में समाज को झकझोर देने वाली एक ऐसी खबर जो बेहद संजीदा है। एक लड़की सरेआम बीच सड़क पर पीटती रही, उसके कपड़े फाड़े गए, उसके अंगों के साथ छेड़छाड़ किया जाता रहा लेकिन दुर्भाग्य देखिए उस युवती का कि कोई उसे बचाने आगे नहीं आया बल्कि तमाशा देखने में ही सब मशगुल रहे। जी हां, खबर मुंबई के सांताव्रूâज इलाके की है जहां मणिपुर की एक २६ वर्षीय युवती पर हमला किया गया। आरोप के मुताबिक उसके अंगों से छेड़छाड़ की गई, पेट में लात मारी गई, बाल पकड़ कर घसीटा गया लेकिन उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। यहां तक कि पुलिस भी हाथ पर हाथ धर कर बैठी रही। विडंबना यह रही कि जब युवती ने एफआईआर दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने कोई ध्यान ही नहीं दिया। शिकायत भी दर्ज की तो गैर संज्ञेय अपराध (एनसी) में। यहां तक कि दर्ज की गई शिकायत में भी कहीं छेड़छाड़ का उल्लेख नहीं किया गया। जबकि युवती ने अपने फटे हुए कपड़े तक पुलिस अधिकारी को दिखाए। बताया गया है कि ये युवती मुंबई में पिछले ५ साल से रह रही थी और मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर काम करती थी। युवती और उसकी बहन कालीना के कोलिवेरी गांव में रहती हैं। बीते शनिवार को युवती अपनी सहेली के साथ शाम साढ़े छह बजे बाहर निकली थी। आरोप के मुताबिक पाम विला सोसाइटी में एक अज्ञात व्यक्ति ने पहले युवती पर थूका। जब युवती ने आपत्ति जताई तो वो व्यक्ति उसे पीटने लगा। युवती के मुताबिक, `उसने मुझे मारा, मेरे पेट में लात मारी, जब मैंने विरोध किया तो वो मुझसे छेड़छाड़ करने लगा। मेरे कपड़े तक फाड़ दिए। मैं गिर पड़ी। तब उसने मुझे बालों से पकड़ा और गली में कुछ मीटर तक घसीटते ले गया।’ युवती की सहेली ने उसे बचाने की कोशिश की तो उसे भी धक्का दे दिया। कोई भी युवती की मदद के लिए आगे नहीं आया। युवती की बहन ने कहा कि `ये पहला मौका नहीं है जब उन्हें नार्थ ईस्ट जैसा चेहरा-मोहरा रखने के लिए भेदभाव का सामना करना पड़ा। लोग समझते हैं कि हम चीन या नेपाल से हैं। भेदभाव की वजह से कोई हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। यहां तक कि जिस दुकानदार से हम सामान लेते हैं वो भी चुपचाप बैठ कर सब देखता रहा।’ युवती की बहन ने कहा, `ये सब अमानवीय और दर्दनाक था। इस घटना के बाद मैं और मेरी बहन बाहर निकलते हुए असुरक्षित महसूस करते हैं। मैं नहीं समझती कि मुंबई अब महिलाओं के लिए सुरक्षित बचा है। ये भी दिल्ली जैसा हो गया है।’