महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच तीखी बयानबाजी जारी


मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों में आई दरार लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार में शामिल शिवसेना बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी और तीखी करती जा रही है। साथ ही पहली बार शिवसेना ने अपनी ही सरकार पर भ्रष्टाचार का खुला आरोप लगाकर बीजेपी को खुली चुनौती दे दी है। मुंबई में मेट्रो के तीसरे फेज के मुद्दे पर बीजेपी को आड़े हाथों लेने के बाद अब खुद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी सड़क पर उतर आए हैं। उद्धव ठाकरे ने गिरगांव में स्थानीय लोगों के साथ मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वो मेट्रो के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ हैं और किसी भी हाल में मराठियों के घर नहीं टूटने देंगे। शिवसेना का ये रुख देख दूसरे विपक्षी दलों ने भी राज्य और केंद्र सरकारों पर जोरदार हमला बोलना शुरू कर दिया है। उल्लेखनीय है कि, हाल ही में शिवसेना ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए सामना में लिखा था कि केंद्र सरकार ने एलईडी बल्ब लगाने का ठेका एक मरी हुई कंपनी को दे दिया है जिसमें करीब २५ हजार करोड़ रुपए का गैर-व्यवहार हुआ है। दरअसल उक्त वंâपनी के पास कोई अनुभव नहीं है और वो दूसरी कंपनियों से एलईडी बल्ब लगवाने का काम करवा रही है। आपको बता दें कि मुंबई में मरीन लाइंस में शिवसेना के विरोध के बावजूद एलईडी बल्ब लगवाया गया है। जिस कंपनी को ये ठेका दिया गया है वो केंद्र सरकार ने २००९ में बनाई थी, लेकिन इस कंपनी ने २०१४ तक कोई काम नहीं किया। साल २०१४ में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद अचानक इस कंपनी को १०० शहरों में एलईडी बल्ब लगाने का काम दे दिया गया है। शिवसेना ने ये भी दावा किया कि इस मामले में अगर जांच हो जाए तो केंद्र सरकार के दो मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है। जाहिर है कि केंद्र सरकार बनने के बाद शिवसेना का ये अब तक का सबसे संगीन आरोप है। ऐसे में शिवसेना के साथ सुर में सुर मिलाते हुए कांग्रेस ने भी पूरे मामले की जांच की मांग कर दी है। जबकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि आप की मांग शिवसेना के लगाए आरोप की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से करवाई जानी चाहिए। शिवसेना समेत विपक्ष के ऐसे आरोपों से परेशान बीजेपी ने अब शिवसेना को चुनौती दी है कि वो अपने आरोप साबित करे या फिर जनता से माफी मांगे। बीजेपी ने दावा किया है कि शिवसेना के सारे आरोप बेबुनियाद है और वो किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार है। बहरहाल महाराठ्र में जिस प्रकार से शिवसेना ने अपनी ही सहयोगी पार्टी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है उससे यही कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन ज्यादा दिनों तक टिकने वाला नहीं है।