मल्टीप्लेक्स में विज्ञापनों से दर्शक बेहाल


– दर्शकों के साथ मल्टीप्लेक्स में लूट
मुंबई। नगरों में पिछले वर्षों में तेजी से मल्टीप्लेक्सों की संख्या बढ़ी है। मल्टीप्लेक्स में फिल्म के साथ पहले ४ मिनिट का विज्ञापन होता था। जो अब बढ़कर २५ मिनिट का हो गया है। विज्ञापनों से मल्टी प्लेक्स संचालक तगड़ी कमाई कर रहे हैं। वहीं फिल्म देखने गया दर्शक विज्ञापनों के कारण बोर हो रहा है। बोर होने की कीमत भी मल्टीप्लेक्स संचालक दर्शकों से वसूल कर रहे हैं।
मल्टीप्लेक्स हाल में दर्शकों को खाने-पीने की चीजें ले जाने की मनाही होती है। मल्टीप्लेक्स की वेंâटीन में बाजार से ४ गुना कीमत पर खाने-पीने की चीजें बेची जा रही हंै। मल्टीप्लेक्स में वही कानून चलते हैं जो संचालक ने बना रखे हैं।
मल्टीप्लेक्स में फिल्म के दौरान विज्ञापनों की भरमार इतनी ज्यादा है कि दर्शकों में शामिल सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के एक समूह ने मल्टीप्लेक्स के मैनेजर से विज्ञापन बंद करने को कहा। जब बात नहीं सुनी गई तो सख्ती से बात समझाई। पिछले माहों में मुंबई, दिल्ली, जयपुर, इंदौर, अहमदाबाद जैसे शहरों में दर्शकों ने मल्टीप्लेक्स में चलते शो में से विज्ञापन बंद कराए हैं। सिनेमाघरों में पिछले दो सालों में फिल्म के दौरान विज्ञापनों और ट्रेलर दिखाने की अवधि ४ मिनट से बढ़कर २५ मिनट तक पहुंच गई है। मल्टीप्लेक्स चेन में पीवीआर, आइनॉक्स, कार्निवाल के देश में १०० से ज्यादा सिनेमाघर और ४०० से ज्यादा स्क्रीन हैं। फन सिनेपोलिस के ५५ सिनेमा और २५० स्क्रीन हैं। पिछले दो साल में फिल्म के दौरान विज्ञापनों और ट्रेलर की अवधि २५ मिनट हो गई है। मल्टीप्लेक्स मालिक पैसा कमाने में जुटे हैं। दर्शक अत्यधिक विज्ञापनों तथा मल्टीप्लेक्स की वेंâटीन में लूट से नाराज हैं। जनहित में सरकार की नियमावली आना बहुत जरूरी है।