भेदभाव रहित इंटरनेट उपलब्ध कराना पहली जिम्मेदारी : रविशंकर प्रसाद


० नेट न्यूट्रैलिटी: सरकार बिना भेदभाव वाले इंटरनेट पहुंच के पक्ष में
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने समान इंटरनेट पहुंच को लेकर बहस तेज होने के बीच `भेदभाव रहित इंटरनेट पहुंच’ का समर्थन करते हुए कहा कि एक विशेषज्ञ समिति इंटरनेट निरपेक्षता के मुद्दे की समीक्षा कर रही है। इस बीच भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) इस मामले में एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस व यूनीनोर सहित कुछ दूरसंचार वंâपनियों की उन योजनाओं के खिलाफ जांच शुरू हो सकता है जिनमें कुछ एप्प `नि:शुल्क’ उपलब्ध कराने का दावा किया है। हालांकि वंâपनियों ने अपनी पहलों का बचाव करते हुए कहा कि यह `नेट निरपेक्षता’ के खिलाफ नहीं हैं। दूरसंचार वंâपनियां, स्टार्टअप, राजनेता व फिल्म अभिनेताओं के इस बहस में शामिल होने के बीच सोशल मीडिया पर इंटरनेट निरपेक्षता को लेकर अलग अलग राय देखने को मिल रही है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरिंवद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर बहस की जरूरत जताई है। नेट निरपेक्षता से आशय इंटरनेट के सारे ट्रेफिक से समान व्यवहार करना है और किसी वंâपनी या एप्प को भुगतान के आधार पर प्राथमिकता देना इस अवधारणा का उल्लंघन माना जाएगा। दूरसंचार नियामक ट्राई भी इस मुद्दे पर विचार कर रहा है। नियामक ने इस मुद्दे पर पिछले महीने परामर्श जारी किया था।
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारा प्रयास भेदभाव रहित इंटरनेट पहुंच उपलब्ध कराने का ही है। उन्होंने कहा कि एक विशेषज्ञ समिति इस मामले की समीक्षा कर रही है जो कि अपनी रपट महीने भर में दाखिल करेगी ताकि सरकार इस मुद्दे पर उचित पैâसला कर सके। इसके साथ ही उन्होंने इंटनेट को मानव माqस्तष्क के सबसे बेहतरीन अविष्कारों में से एक बताया। दूरसंचार वंâपनी एयरटेल इस सारी बहस के वेंâद्र में है। वंâपनी ने एक नया मार्वेâिंटग प्लेटफार्म `एयरटेल जीरो’ पेश किया जिसके जरिए कछ एप नि:शुल्क उपलब्ध हैं क्योंकि इसका खर्च एप्प बनाने वाले उठाते हैं।
इंटरनेट की आजादी के पैरोकारों व नयी वंâपनियों (स्टार्टअप) का कहना है कि एयरटेल के इस प्लेटफार्म से `कुछ लोगों के दबदबे तथा छोटी वंâपनियों के सिकुड़ने’ की आशंका है। एयरटेल ने अपने इस कदम को उचित ठहराते हुए इसे सभी के लिए `फायदे’ का सौदा बताया। ई-कामर्स वंâपनी ाqफ्लपकार्ट के संस्थापक सचिन बंसल ने एयरटेल जैसी पहलों का समर्थन करते हुए ट्वीट किया कि जब विदेशी वंâपनी भारत में यह करे तो नवोन्मेष और भारतीय करें तो उल्लंघन।