भारतीयों को चीन दे सकता है वीजा ऑन-अराइवल की सुविधा


– पर्यटन विकास के लिए वीजा नियम आसान बनाने की पहल
नईदिल्ली। भारतीयों को चीन जल्द वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा दे सकता है। इसका मतलब यह है कि वे बीिंजग या शंघाई पहुंचने के बाद भी वीजा हासिल कर सकते हैं। िंसगापुर, ब्रुनेई और जापान के नागरिकों को चीन ने पहले से यह सुविधा दे रखी है और भारत इस सूची में अगला देश बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई के मध्य में बीिंजग दौरे के मद्देनजर दोनों देशों के बीच रिश्तों में यह बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, इसे मुमकिन बनाने के लिए कई बाधाओं को दूर करने की जरूरत होगी।
मसलन इस बारे में दोनो देशो में पहले कौन कदम उठाएगा और इससे सुरक्षा एजेंसियां और डिपेंâस डिपार्टमेंट किस तरह तालमेल बिठाएंगे। बीिंजग में मौजूद भारतीय दूतावास ने चाइनीज टूरिस्ट्स के लिए वीजा-ऑन-अराइवल (वीओए) की वकालत करते हुए सिक्योरिटी संबंधी पाबंदियों में ढील देने की मांग की है, ताकि चीन से ज्यादा से ज्यादा निवेश का रास्ता साफ हो सके। फिलहाल भारत-चीन के बीच सीमा विवाद है और दोनों देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संसाधनों और प्रभाव के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने इस बार के बजट में वीजा-ऑन-अराइवल का दायरा ४३ से बढ़ाकर १५० देशों तक करने का ऐलान किया है। यह काम कई चरणों में किया जाएगा। डिप्लोमेटिक सूत्रों को उम्मीद है कि अगर चीन को अगले दो महीनों में इस सुविधा के तहत पहले चरण में शामिल किया जाता है, तो मोदी के दौरे में पड़ोसी देश भी इसका पॉजिटिव जवाब दे सकता है। यह प्लान शॉर्ट टर्म दौरे के लिए आने वाले टूरिस्ट्स से जुड़ा है। इनकम में बढ़ोतरी के साथ ही चाइनीज टूरिस्ट घूमने-फिरने पर काफी खर्च कर रहे हैं। हालांकि, चीन के मुकाबले भारतीय इस पर कम खर्च करते हैं। चीन फिलहाल ‘विजिट इंडिया ईयर २०१५’ अभियान चला रहा है। टूरिज्म को बढ़ावा देने और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए भारत में २०१६ में यह अभियान चलाया जाएगा। इस मामले पर दिल्ली ाqस्थत चीनी दूतावास ने ईटी के सवाल का जवाब नहीं दिया।हालांकि, चीनी सरकार के सूत्रों के मुताबिक पिछले साल सितंबर में प्रेजिडेंट शी जिनिंपग की भारत यात्रा के दौरान वीजा नियमों को उदार बनाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर होने थे, लेकिन इसे टाल दिया गया था। अब वे इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या मोदी के चीन दौरे में इसे फाइनल किया जा सकता है। इंडस्ट्री और अधिकारियों का कहना है कि चीन से निवेश और टूरिस्ट्स में बढ़ोतरी के लिए भारत को वीजा नियमों को उदार बनाने की जरूरत है। चीन में भारत के एंबेसडर अशोक वंâठ ने भी कुछ ऐसा ही सुझाव दिया है। माना जा रहा है कि सैलानियों के अलावा उन्होंने कॉन्प्रेंâस और बिजनेस ट्रिप के लिए भी आसान वीजा नियमों की सिफारिश की है।