भाजपा की नजर अब मणिपुर और त्रिपुरा पर


नई दिल्ली। असम के बाद अब भाजपा की नजरें मणिपुर और त्रिपुरा पर हैं। पार्टी को आशा है कि असम की रणनीति के साथ ही इन दो िंहदू बाहुल्य राज्यों को फतह किया जा सकता है। भविष्य की योजना के अनुसार इन दो राज्यों की जीत न सिर्पâ ईसाई बहुल नगालैंड और मेघालय में भी जीत का आधार बना सकती है बाqल्क मिशन २०१९ के लिए लोकसभा और राज्यसभा के आंकड़े भी दुरुस्त कर सकती है। ऐसे में भाजपा का मिशन पूर्वोत्तर अब और तेज हो सकता है।
असम में मुख्यमंत्री सोनोवाल और सरकार में नंबर दो हेमंत विश्व शर्मा की जोड़ी को भाजपा पूरे पूर्वोत्तर में भुनाएगी। असम की तर्ज पर ही पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में कांग्र्रेस के खिलाफ मोर्चा तैयार किया जाने लगा है। कमान असम चुनाव के ठमैन आफ द मैचठ हेमंत को दी गई है। उन्हें राज्य के पूर्वोत्तर घटक दलों का संयोजक बनाया गया है। सूत्र के अनुसार भाजपा का अगला ध्येय मणिपुर और त्रिपुरा है। मणिपुर में हालांकि ईसाई मतावलंबियों की संख्या लगभग िंहदू आबादी के बराबर है। लेकिन उस दशा में भी यह असम से थोड़ी आसान लड़ाई है। केरल के अलावा त्रिपुरा वाम मोर्चा का अकेला अखाड़ा बच गया है।
यहां िंहदू आबादी लगभग ८३ फीसद है। मणिपुर में अगले ही साल चुनाव है जबकि त्रिपुरा में लगभग डेढ़ साल बाद। ऐसे में भाजपा सूत्रों का कहना है कि असम के पड़ोस में होने के कारण इन राज्यों में भाजपा प्रशासन के जरिए भी अपना प्रभाव बना सकती है। ध्यान रहे कि अरुणाचल प्रदेश में में पहले भाजपा सर्मिथत सरकार है।मणिपुर और त्रिपुरा भाजपा अपनी झोली में करने में सफल हुई तो नगालैंड और मेघालय में लड़ाई अच्छी हो सकती है। दरअसल इन राज्यों की लड़ाई ने केवल सत्ता के कारण महत्वपूर्ण है बाqल्क मिशन २०१९ का भी एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। पूरे पूर्वोत्तर में लोकसभा की २५ और राज्यसभा की १४ सीटें हैं। भाजपा के पास फिलहाल इनमें से लोकसभा की मात्र छह सीटें हैं जबकि राज्यसभा में एक भी सदस्य नहीं है। सिाqक्कम को छोड़कर बाकी के सभी राज्यों में लोकसभा से पहले ही चुनाव होने हैं।
राज्यसभा के १४ में ११ सदस्य कांग्रेस के हैं। हालांकि इन राज्यों में राज्यसभा की अधिकतर सीटें २०१९ के बाद ही खाली हो रही हैं। इस पूरी रणनीति में फिलहाल केवल सिाqक्कम ऐसा राज्य बच रहा है। इसी रणनीति के तहत पूर्वोत्तर पर भाजपा की खास नजरें रहेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी हाल में भी पूर्वोत्तर के दौरे से लौटे हैं। भाजपा के शीर्ष नेताओं और वेंâद्रीय मंत्रियों का दौरा न सिर्पâ बढ़ेगा बाqल्क कुछ खास योजनाएं भी बन सकती हैं।