बोडो और बांग्लादेशी आतंकियों में टक्कर?


गुवाहाटी. असम के बोडो इलाके में बांग्लादेशी आतंकियों की मौजूदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. यहाँ आतंकी समूह जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है जिनकी योजना असम में दूसरे उग्रवादी समूहों द्वारा मुसलमानों पर किए गए हमले का ‘बदला’ लेने की थी.
इससे पहले १७ अप्रैल को भी पुलिस जेएमबी के चार कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने अब तक जेएमबी से ताल्लुक रखने वाले कम से कम २९ लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें कई फिलहाल ़जमानत पर बाहर हैं.
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोग जेएमबी के एक मॉडयूल का हिस्सा हैं जिनकी योजना दौखानगर गांव के एक शिविर में स्थानीय मुाqस्लमों को प्रशिक्षण देने की थी जिसके बाद प्रतिबंधित उग्रवादी समूह एनडीएफबी समेत स्थानीय बोडो समुदाय पर हमले किए जाने थे.
इस क्षेत्र के बांग्लाभाषी मुाqस्लम निवासी मोटे तौर पर गरीब और अशिक्षित हैं और वे लंबे समय से बोडो िंहसा का शिकार होते रहे हैं, साथ ही उग्रवादी समूह एनडीएफबी का संगबजीत धड़ा भी इन्हें अपना निशाना बनाता रहा है. ये इलाके मुाqस्लमों के खिलाफ िंहसा के सिलसिलेवार गवाह रहे हैं, कोकराझार में २०१२ में दंगा हुआ था जिसमें १०० से ज्यादा लोग मारे गए थे , २०१४ में बक्सा में ३८ मुाqस्लमों को मार दिया गया था. इन दंगों में चार लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे. इन लोगों की हालांकि पैसे और हथियारों तक पहुंच नहीं थी और वे देसी बंदूकों व फिरौती की रकम पर ही आश्रित थे. बाद में इन्हें पुलिस ने पकड़ लिया था.