बेहद खराब हालात में नौकरी कर रहे है रेलवे ड्राइवर टॉयलेट का भी ब्रेक नहीं मिलता


नई दिल्ली । देश में ६९,००० ड्राइवर हैं जो १९,००० ट्रेनों को पटरियों पर हमेशा दौड़ाते हैं। अब इन ड्राइवरों की एक वाजिब समस्या सामने आई है। शिकायत है कि ये ड्राइवर बेहद खराब हालात में नौकरी करने को मजबूर हैं। १२ घंटे की शिफ्ट के दौरान उन्हें खाने-पीने, यहां तक कि टॉयलेट के लिए भी ब्रेक नहीं मिलता।
द इंडियन रेलवे लोको रिंनग मेन्स ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि ड्राइवरों के लिए अमानवीय परिाqस्थतियां हैं। उन्हें शारीरिक और मानसिक तनाव के बीच अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना पड़ रहा है। हो सकता है कि रेल दुर्घटनाओं के पीछे भी यह एक कारण हो।
वहीं, रेलवे बोर्ड का मानना है कि पैसेंजर, एक्सप्रेस, हाई स्पीड और कार्गो ट्रेनों के ड्राइवरों को ब्रेक नहीं दिया जा सकता है क्योंकि इससे यात्रियों को परेशानी होगी।
ऑर्गनाइजेशन ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई है।इससे पहले रेलवे बोर्ड के सामने मांग रखी गई, जिसे खारिज कर दिया गया।
रेलवे कई बार कह चुका है कि रिप्रेâशमेंट या टॉयलेट के लिए ड्राइवरों को ट्रेन रोकने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि दूसरी ट्रेनें भी प्रभावित होती हैं।
रोड़ ट्रांसपोर्टेशन में पांच घंटे बाद ड्राइवर को रुकने का अधिकार है। वहीं दिल्ली मेट्रो ट्रेन में हर तीन घंटे बाद ड्राइवर को चालीस मिनट का ब्रेक मिलता है। एयरलाइन्स में पायलट को नियमित अंतराल में विमान दिया जाता है।वहीं रेल ड्राइवरों को ट्रेन के स्टेशन पर रुकते समय महज एक या दो मिनट का ब्रेक मिलता है। क्या इन ड्राइवरों को शांति से कुछ खाने या टॉयलेट का जाने का अधिकार भी नहीं है?