बिहार में ताड़ी पर भी प्रतिबंध


पटना। बिहार में देशी शराब के बाद अब ताड़ी को बेचने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस पैâसले से ग्रामीण अंचलों की हजारों दुकानों पर ताले लटक जाएंगे।
जानकारी के अनुसार यह ताड़ के पेड़ से निकाली जाती है और प्राकृतिक पेय के रूप में इस्तेमाल होती रही है। देसी शरब की बिक्री पर रोक लगने से लाखों लोग ताड़ी पर निर्भर हो गए थे, लेकिन अब जब इस पर भी रोक लग गई है तो विरोध की भी प्रबल आशंका बन गई है। नीतीश सरकार के पैâसले के अनुसार ताड़ी बेचने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा। लेकिन कोई व्यक्ति सिर्पâ अपने उपभोग के लिए पेड़ से ताड़ी निकालता है तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी।उधर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने रविवार को सरकार के इस पैâसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि देसी शराब के बाद ताड़ी की बिक्री पर रोक लगाना अनुचित है।
मांझी ने कहा, ताड़ी प्राकृतिक पेय है। इसका इस्तेमाल दवा के रूप में होता है। मैंने भी १५ दिनों तक ताड़ी का सेवन किया है। ताड़ी के व्यापार से अधिकांश दलित और गरीब लोग जुड़े हैं इसलिए सरकार को अपने पैâसले पर पुर्निवचार करना चाहिए। मांझी ने कहा कि पूर्व मुख्यंत्री लालू प्रसाद यादव ने ताड़ी के व्यवसाय से जुड़े खासतौर पर पासी जाति की मदद के लिए अपने शासन काल में ताड़ी को कर मुक्त किया था। उल्लेखनीय है कि शहरी इलाकों के विपरीत बिहार के ग्रामीण इलाकों में शराब बंदी प्रभावी दिख रही है। गत गुरुवार की देर रात से ही ग्रमीण इलाकों में करीब ४५, ००० हजार देसी दारू की दुकानें बंद हो गर्इं। बिहार सकार ने सिर्पâ देसी और मसालेदार शराब की बिक्री पर रोक लगाई है। हालांकि शहरों में सरकारी दुकानों पर भारत में र्नििमत विदेशी शराब की बिक्री जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि शराबबंदी का असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। २०१५-१६ के बजट के अनुसार शराब की बिक्री से सरकार को ४००० करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। अब देसी पर रोक लगने से सराकर की आमदनी घटेगी। पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर ने भी १९७७-७८ में शराब बंदी लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हुए थे।