बच्चे पर हाथ उठाने पर माता-पिता भी होगें दंडित


नई दिल्ली । नया किशोर न्याय अधिनियम शुक्रवार से लागू हो चुका है जिसके मुताबिक बच्चों से मारपीट करने पर मां-बाप को तीन से दस साल तक जेल और पांच लाख रुपए तक जुर्माना हो सकेगा। इसके अलावा बच्चों को अपराध करने से रोकने के लिए भी कानून सख्त कर दिए गए हैं। अधिनियम के तहत दुष्कर्म व हत्या मामलों में लिप्त १६ से १८ वर्ष के किशोरों को अब वयस्क माना जाएगा। गंभीर अपराध पर १६ साल से बड़े बच्चों के खिलाफ सामान्य अपराधियों की तरह मुकदमा चल सकेगा। इन्हें वयस्क मानते सजा होगी। पहले ऐसे दोषियों को अधिकतम तीन साल बाल सुधार गृह में रखा जाता था। नए कानून में किशोर शब्द को नकारात्मक प्रवृत्ति से बचाने को बच्चे शब्द का इस्तेमाल किया है। दिल्ली के निर्भया प्रकरण के बाद से संशोधन के लिए दबाव था।
गंभीर अपराधों में दोषी होने या सुनवाई के दौरान नाबालिग को २१ साल का होने तक बाल सुधार गृह में रखा जाएगा। जुवेनाइल जाqस्टस बोर्ड की समीक्षा के बाद शेष सजा सामान्य जेल में काटनी होगी। बच्चों को सिगरेट, बीड़ी व अन्य तम्बावूâ उत्पाद, ड्रग व शराब बेचने पर सात साल तक सजा व एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों हो सकेगा। अभी २०० रुपए जुर्माना था। तंबावूâ बिक्री पर सख्त कानून वाला भारत पहला देश बना। बच्चों से भीख मंगवाने वालों पर अब पांच से दस साल तक की सजा और एक लाख रुपए तक जुर्माना। कुछ नई परिभाषाएं जोड़ी हैं। इसमें अनाथ, अकेला और आत्मसमर्पण करने वाला बच्चा शामिल है। बाल श्रम पर अब तीन के बजाय ५ साल सजा व एक लाख रुपए तक जुर्माना होगा। उन संस्थाओं पर कार्रवाई होगी, जो बिना पंजीयन बच्चों को पढ़ाई के नाम पर रखते हैं। मालूम हो, प्रदेश में हालिया वर्षों में ऐसे कई मामले पकड़े गए थे।