फ्री स्पीच फेस्टिवल में दिखाईं बैन फिल्में


नई दिल्ली (ईएमएस)। दंगों पर बनी सेंसर बोर्ड द्वारा प्रतिबंधित फिल्म ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ राजधानी में पहली बार फ्री स्पीच फिल्म फेस्टिवल के मंच पर दिखाई गई। गांधी शांति प्रतिष्ठान के ऑडिटोरियम में दर्शकों ने इसके अलावा दो अन्य फिल्में भी दिखाई गईं। फिल्मकारों, काटूर्निस्ट और लेखकों द्वारा बने द अपोजीशन ग्रुप की ओर से पहली बार यह प्रयास किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में निर्माता राज अमित कुमार की फिल्म अनफ्रीडम दिखाई गई। यह फिल्म समलैंगिक अधिकारों पर बनी है। इसकी रिलीज पर सेंसर बोर्ड ने रोक लगा दी थी। कार्यक्रम में मौजूद फिल्म निर्माता पवन के श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी तमाम फिल्में जो प्रतिबंधित कर दी गई हैं, उन्हें द अपोजीशन जनता के सामने लाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ वही फिल्म है, जो हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला ने कैंपस में दिखाई थी। इसी के विरोध में तमाम फासीवादी ताकतें एक हो गई थीं। हम सब अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरे लगाने वालों के खिलाफ एक तरह का प्रतिरोध पैदा कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे फिल्मकार व युवाकवि मयंक बोकोलिया ने कहा कि हम लोकतांत्रिक देश में रह रहे हैं। किसी भी विषय पर फिल्म बनाने पर रोक नहीं लगनी चाहिए। महोत्सव में सेंसर बोर्ड के रवैये और अभिव्यक्ति की आजादी पर चर्चा भी की गई।