पहरेदारी करने facebook से ‘दोस्ती’ करते है अधिकतम बुजुर्ग


नई दिल्ली। न सिर्पâ युवा बाqल्क बुजुर्ग भी पेâसबुक के सबसे तेजी से बढ़ रहे समुदाय का हिस्सा बन रहे हैं। लेकिन उनकी पेâसबुक से दोस्ती की वजह पहरेदारी है। शोधकर्ताओं के दल ने यह जानकारी दी। इस दल में एक भारतीय मूल के शोधार्थी व पोqन्सलवेनियास्टेट यूनिर्विसटी के प्रोपेâसर एस. श्याम सुंदर भी हैं। उनका कहना है कि बुजुर्ग भी पेâसबुक से उन्हीं कारणों से जुड़ते हैं जिसके कारण युवक-युवतियां पिछले एक दशक से पेâसबुक से जुड़ रहे हैं। सुंदर के मुताबिक बुजुर्ग सामाजिक संबंध और जिज्ञासा से प्रेरित होकर पेâसबुक से जुड़ते हैं, लेकिन वे पेâसबुक का प्रयोग सामजिक पहरेदार के रूप में अधिक करते हैं। सुंदर ने बताया कि बुजुर्ग देखते हैं कि उनके बच्चे या पोता-पोती पेâसबुक पर क्या कर रहे हैं। इससे पहले ऐसा ही अध्ययन पेâसबुक से कॉलेज छात्रों के जुड़ने को लेकर किया गया था। इसमें सामाजिक संबंध बनाने और पेâसबुक के प्रयोग के बीच सकारात्मक संबंध देखा गया था। पोqन्सलवेनियास्टेट यूनिर्विसटी के मास कम्युनिकेशन शोधार्थी इयुन हवा जुंग कहते हैं कि हमारे शोध से यही बात बुजुर्गो के संबंध में पता चली है। शोधकर्ताओं ने पाया कि अपने परिवार से जुड़ने की इच्छा या फिर अपने पुराने दोस्तों से जुड़ने की इच्छा के कारण लोग पेâसबुक से जुड़ते हैं। जंग कहते हैं कि बुजुर्ग जिज्ञासा के कारण भी पेâसबुक से जुड़ते हैं। शोध के अनुसार बुजुर्ग रोजाना २.४६ बार पेâसबुक पर जाते हैं और औसतन ३५ मिनट रोज बिताते हैं।