पंजाब में किसानों की आत्महत्या चुनावी मुद्दा


चंडीगढ़ । पंजाब के आगामी चुनावों में किसानों की आत्महत्या और कृषि की दशा बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। जहरीली होती जमीन और कीटनाशकों, उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से किसानों की बर्बादी इस बार चुनावी ?़िजा को गर्माऐ रखेगी।
किसानों की दुर्दशा और उनकी आत्महत्या का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का वेंâद्र होगा। पंजाब में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। तीन दशक पहले तक कोई शायद यह सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन पंजाब में कृषि समस्या इस कदर बढ़ जाएगी कि किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ेगा। पंजाब हरित क्रांति का वेंâद्र रहा है। हालांकि अब कृषि समस्या पंजाब की सच्चाई है।
राज्य में किसान और मजदूरों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। किसानों के आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है। पंजाब में फिलहाल १०.५३ लाख किसान परिवार हैं और इनमें से ३.६ लाख परिवार छोटे और मझोले किसानों की श्रेणी में आते हैं जिनके पास पांच एकड़ से कम की भूमि का मालिकाना हक है। ग्रामीण इलाकों में किसानों की आत्महत्या के मूल में र्आिथक तंगी है।