निचली बहराई में मिलीं 400साल पुरानी छतरियां


-सिंधिया रियासत की छतरियों से पुरानी है यह छतरियां
मुरैना । पुरातत्व विभाग को पहाड़गढ़ के घने जंगलों के बीच निजली बहराई गांव में ४०० साल पुरानी छतरियां मिली हैं। यह छतरियां १६ वीं सदी की हैं। सैकड़ो वर्ष बाद भी लगभग ८ छतरियां काफी अच्छी हालत में हैं। जबकि इतनी ही छतरियां यहां और है जो ध्वस्त हो चुकी है। यह छतरियां यहां के रहने वाले गुसाई परिवार के गुरू व पूर्वजों की हैं। यह छतरियां सिंधिया रियासत की छतरियों से काफी पुरानी हैं। एक सर्वे के दौरान पुरातत्व विभाग और नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हैरिटेज (इंटेक) की नजर इन छतरियों पर पड़ी। इंटेक के विशेषज्ञ और पुरातत्व विभाग के अधिकारी अशोक शर्मा ने दो हफ्ते पहले इस इलाके का सर्वे किया था। इस दौरान उन्हें निजली बहराई गांव के पास के जंगली इलाके में कुछ पुरानी छतरियां दिखाई दी। इन भव्य और श्रंखलाबद्ध छतरियों को देख कर इंटेक के विशेषज्ञों ने बताया कि यह छतरियां १६ वीं सदी की हैं। इनकी खासियत इनकी बनावट है। जो ४ खंबों से लेकर १६ खंबों तक की बनी हैं। इनमें छोटी से लेकर बड़ी छतरियां तक शामिल हैं। पुरातत्व अधिकारी शर्मा के अनुसार यहां पर मिली छतरियोंं में से एक छतरी १६ खंबों वाली है जो सबसे बड़ी है, इसके अलावा ३ छतरियां ८-८ खंबों वाली हैं। इसी तरह की बनावट वाली ४ छतरियां और हैं जो ४-४ खंबों वाली हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन छतरियों के समूह को संरक्षित किया जा सकता है। यह छतरियां बेहद आर्वâषक और महत्वपूर्ण हैं।