देश में 25 वर्षों में 25 हजार से अधिक दंगे


साढ़े दस हजार लोगों की जान गई
बलिया। दंगा एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही हर व्यक्ति कांप जाता है। जिसने इस दंश को भुगता हो, उसकी पीड़ा बयां नहीं की जा सकती। आरटीआइ के जरिए गृह मंत्रालय की ओर से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। १९९० से २०१५ के बीच देश में कुल २५ हजार से अधिक दंगे हो चुके हैं। इन २५ वर्षों में हुए दंगों में लगभग साढ़े दस हजार लोगों की जान गई और करीब साढ़े तीस हजार लोग घायल हुए। गाजीपुर के र्उिसया गांव निवासी आरटीआइ कार्यकर्ता शम्स तबरेज हाशमी ने १९९० से २०१५ तक सभी राज्यों में हुए साम्प्रदायिक दंगों, इनमें मरने वालों व घायलों की संख्या की जानकारी के लिए २१ जनवरी को प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग, नई दिल्ली में एक ऑनलाइन आरटीआइ आवेदन दाखिल किया था।
इसे २७ जनवरी को गृह मंत्रालय को ट्रांसफर किया गया। मंत्रालय की उपसचिव रीना गुहा की ओर से आठ फरवरी को डाक से भेजी रिपोर्ट १५ फरवरी को हाशमी को प्राप्त हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि १९९० से २०१५ के दौरान २५३३७ दंगे हुए। इनमें मरने वालों की संख्या १०४५२ तथा घायलों की संख्या ३०५१५ है।
देश में हुए प्रमुख दंगे १९९० में १५९३ दंगे, १८३५ मारे गए १९९१ में १७२७ दंगे, ८७८ मारे गए १९९२ में ३५३६ दंगे, १९७२ मारे गए १९९३ में १०४२ दंगे, ११३५ मारे गए २००२ में ७२२ दंगे, ११३० मारे गए।
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान २०१२ से अक्टूबर २०१५ तक कुल ६३७ दंगे हुए। जिनमें १६२ लोग मारे गए व १६१४ लोग घायल हुए। सबसे ज्यादा २४७ दंगे २०१३ में हुए। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि लोक प्रशासन और पुलिस राज्य सरकारों के दायरे में आते हैं। इसका वेंâद्र सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही कानून व्यवस्था, अपराधों की रोक-थाम और जन-धन की हानि के लिए सीधे राज्य सरकारें जिम्मेदार होती हैं।