देश में बढ़ी स्लम आबादी


-आंध्र प्रदेश झुाqग्गयों के मामले में पहले स्थान पर
नईदिल्ली। जहां देश के कई राज्यों में `स्लम आबादी’ तेजी से बढ़ रही है, वहीँ अपने झुग्गी बाqस्तयों के लिए बदनाम महाराष्ट्र एवं दिल्ली की `स्लम आबादी’ में कमी आयी है. वेंâद्र सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.
भारत की कुल स्लम आबादी का अब केवल १८ फीसदी हिस्सा ही महाराष्ट्र में रहता है. २००१ की जनगणना के समय देश की कुल स्लम आबादी का २३ फीसदी महराष्ट्र में बसता था. इस दौरान देश की कुल स्लम आबादी में २५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है और वह ५.२३ करोड़ से बढ़कर ६.५५ करोड़ तक जा पहुंची है.
सर्वाधिक स्लम आबादी वाले राज्य
शहरी विकास मंत्रालय की इस रिपोर्ट में २००१ और २०११ की स्लम आबादी की तुलनात्मक जानकारी दी गई है. शहरी विकास मंत्री एम. वैंकेया नायडू द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महाराष्ट्र की तरह दिल्ली और यूपी की स्लम आबादी में भी कमी आई है. २००१ में जहां देश की कुल स्लम आबादी का ४ फीसदी लोगों का बसेरा दिल्ली में था, वहीं २०११ में यह कम होकर ३ फीसदी ही रह गया है. यूपी में भी स्लम आबादी ११ फीसदी से घट कर १० फीसदी रह गई है. इसी तरह से पंजाब में भी स्लम आबादी ३ प्रतिशत से कम होकर २ प्रतिशत ही रह गई है.
महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पाqश्चम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में देश की कुल स्लम आबादी का ७० फीसदी हिस्सा रहता है. स्लम आबादी में आनुपातिक कमी के बावजूद महाराष्ट्र अब भी स्लम आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है. इसके बाद अविभाजित आंध्र प्रदेश का नंबर आता है. देश की कुल स्लम आबादी का १६ प्रतिशत आंध्र प्रदेश की झुाqग्गयों में बसता है. बढ़ोत्तरी के लिहाज से आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है. २००१ में यहां १२ फीसदी स्लम आबादी थी. तमिलनाडु की स्लम आबादी ८ से बढ़कर ९ फीसदी हो गई है. कर्नाटक में स्लम आबादी ४ से बढ़कर ५ फीसदी हो गई तो मध्य प्रदेश में भी स्लम आबादी ७ से बढ़कर ९ प्रतिशत हो गई है.
२०११ की जनगणना के आधार पर साांqख्यकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश में साढ़े छह करोड़ से ज्यादा लोग स्लम में रहते हैं. यानी इंग्लैंड या इटली की कुल आबादी जितने लोग भारत में स्लम में रहने को मजबूर हैं. एक अनुमान के मुताबिक २०१७ तक देश की कुल स्लम आबादी लगभग १०.४ करोड़ होगी. बुनियादी जरूरतों के लिए तरसने वाले इन स्लमों में लोगों के रहन-सहन का स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा, मृत्यु दर, मानसिक तनाव आदि मानकों पर ाqस्थति िंचताजनक है.