देश में घट रहा तम्बाकू उत्पादों का उपयोग


नई दिल्ली। पहली बार देश में जानलेवा तंबावूâ उत्पादों का उपयोग कम हो रहा है। देश के १५ राज्यों और वेंâद्र शासित प्रदेशों में किए गए व्यापक सर्वे में यह सच्चाई सामने आई है। हालांकि, तंबावूâ का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि अब भी कई राज्यों में ५० फीसदी से ज्यादा पुरुष इनका उपयोग कर रहे हैं। हरियाणा जैसे राज्य में जहां कभी हुक्का-पानी बंद कर सामाजिक बहिष्कार की बात की जाती थी, वहां भी अब तंबावूâ उत्पादों के खतरे को लोग बखूबी समझ रहे हैं। यहां पिछले दस साल में पुरुषों में तंबावूâ सेवन में ११ फीसदी और महिलाओं में दो फीसदी कमी आई है। त्रिपुरा जैसे राज्य में भी इस दौरान पुरुषों में आठ फीसदी और महिलाओं में छह फीसदी की कमी देखी गई।
देश में स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का पता लगाने के लिए दस साल बाद हुए चौथे ’’राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे’’ (एनएफएचएस-४) के पहले चरण में जिन १५ राज्यों और वेंâद्र शासित प्रदेशों के नतीजे आए हैं, उनमें सिर्पâ आंध्र प्रदेश ही बड़ा राज्य है, जहां इसमें बढ़ोतरी हुई है। हालांकि अभी तंबावूâ के खतरे को लेकर इसलिए नििंश्चत नहीं हुआ जा सकता, क्योंकि अब भी मेघालय में ७२, त्रिपुरा में ६८, मध्य प्रदेश में ६०, पाqश्चम बंगाल में ५९ और बिहार में ५० फीसदी पुरुष तंबावूâ का सेवन कर रहे हैं।
तंबावूâ के खतरे पर लंबे समय से अध्ययन कर रहे वरिष्ठ एपिडेमोलॉजिस्ट डा. पीसी गुप्ता कहते हैं कि २००३ में सिगरेट और अन्य तंबावूâ उत्पाद कानून (कॉटपा) के लागू होने के बाद से देश में कई उपाय अपनाए गए हैं, जिनका असर अब देखने को मिल रहा है। इनमें गुटखे पर प्रतिबंध, तंबावूâ उत्पादों पर सचित्र चेतावनी और फिल्मों में धूमपान के दृश्यों को लेकर की गई सख्ती का सबसे ज्यादा असर दिखा है। साथ ही वह कहते हैं कि यही वह समय है जब एक साथ जागरूकता बढ़ाने वाले उपायों को तेज करने, नियमों को सख्ती से लागू करने और लत छोड़ने के उपायों को सुलभ तरीके से उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जाए तो यह बदलाव और तेज हो सकता है।