दीवार के आर पार दिखाएगा ‘दिव्यचक्षु’


नई दिल्ली। रक्षा वैज्ञानिकों ने बंधक प्रकरण जैसी ाqस्थतियों में रक्षा बलों की मदद की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। उन्होंने एक ऐसा रडार विकसित किया है जो दीवार के पार देख सकता है। देश के प्रमुख सरकारी संस्थान डीआरडीओ द्वारा विकसित थर्मल इमेिंजग रडार को ‘दिव्यचक्षु’ (दैवी आंख) नाम दिया गया है। डीआरडीओ के बेंगलुरु ाqस्थत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड रडार डेवलपमेंट एस्टौqब्शमेंट में अभी इसका परीक्षण किया जा रहा है। इस परियोजना पर काम रहे एक वैज्ञानिक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि यह रडार २० से ३० सेंटीमीटर मोटाई वाली किसी भी चीज की बनी दीवार के पार दृश्य दिखा सकता है। इससे दीवार की दूसरी तरफ २० मीटर की दूरी तक में हो रही गतिविधियां और वहां मौजूद लोगों की स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रडार से गतिविधियों की जानकारी मिलने से आतंकियों का पता लगाने और उनमें और बंधकों में भेद करने में मदद मिल सकती है। इमारतों या पठानकोट एयर बेस जैसे आतंकी हमलों से निपटने में यह उपयोगी साबित हो सकता है। अभी भारतीय सेना के पास कोई ऐसा यंत्र नहीं है। २००८ के मुंबई हमले के बाद इस तरह के रडार के विकास की जरूरत महसूस की गई। इसके बाद २०१० में इस परियोजना को शुरू किया गया। इस साल के अंत तक इसका परीक्षण पूरा हो जाने की उम्मीद है।