दीमापुर हत्या मामले में 14 गिरफ्तार


दीमापुर। नागालैंड के दीमापुर में रेप आरोपी की हत्या के मामले में पुलिस ने १४ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. रेप की घटना से आक्रोशित भीड़ ने गुरुवार को जेल पर हमला करके आरोपी को बाहर निकालकर सरेआम उसकी हत्या कर दी. गिरफ्तार लोगों से पुलिस की पूछताछ कर रही है.
वेंâद्र सरकार ने राज्य सरकार को इस घटना से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था. सैयद फरीद खान की हत्या में संलिप्त लोगों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उनके खिलाफ मुकदमा शीघ्र दायर करने की कोशिश में स्थानीय पुलिस जुट गई है। रविवार सुबह को खबर आई की पुलिस ने १४ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया है.
नागालैंड के अधिकारियों ने शनिवार को खान का शव उसके परिवार को असम-नागालैंड सीमा पर खतखाती इलाके में सौंप दिया. बाद में उनके शव को असम के करीमनगर जिले में ाqस्थत उसके पैतृक गांव ले जाया गया. शव पहुंचने के बाद जिले के बदरपुर इलाके में तनाव पैâल गया. दिल दहला देने वाली हत्या को लेकर लोग उत्तेजित हैं।
पुरानी कारों की खरीद-बिक्री करने वाले ३५ वर्षीय सैयद फरीद खान पर एक २० वर्षीय नागा महिला के साथ २३ और २४ फरवरी को दो अलग-अलग जगहों पर दुष्कर्म करने का आरोप था. पुलिस ने खान को २५ फरवरी को गिरफ्तार किया और निचली अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.
भीड़ खान को जेल से घसीटते हुए शहर के घंटाघर पहुंची, पर तो जाकर मारपीट की जिससे उसकी मौत हो गई. जेल से इस स्थान तक की दूरी सात किलोमीटर थी. भीड़ ने उसके बाद उसके शव को घंटाघर में लटका दिया. उसके बाद पुलिस पहुंची और उसने शव को अपने कब्जे में लिया.
नागालैंड सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और तीन वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. हालात को नियंत्रित न कर पाने की वजह से उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है. मुख्यमंत्री ने शनिवार को इस घटना में प्रशासनिक लापरवाही होना स्वीकार किया.
नई दिल्ली में वेंâद्रीय गृह मंत्री राजनाथ िंसह ने शनिवार को नागालैंड सरकार से दीमापुर में दुष्कर्म के आरोपी वैâदी की खुलेआम हत्या करने के मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था.
असम के ट्रक चालकों ने यहां से दीमापुर और नागालैंड के अन्य हिस्सों के लिए ट्रकों का परिचालन शनिवार से रोक दिया. ट्रक संचालकों के कम से कम १७ संगठनों ने कहा कि जब तक पीड़ित व्यक्ति के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा.