दिव्यांग व बुजुर्गों के लायक बनेंगी शहरी इमारतें


नई दिल्ली। शहरी विकास के ढांचागत विकास में दिव्यांग और बुर्जुर्गों की सहूलियत का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सार्वजनिक उपयोग वाली सभी सरकारी व निजी इमारतों के निर्माण में गहरी संवेदनशीलता दिखानी होगी। शहरी विकास मंत्रालय ने इस संबंध में एक विस्तृत दिशा-निर्देश सभी राज्य सरकारों को भेजा है। नई इमारतों के निर्माण में जहां शुरुआती तौर पर ही एहतियात बरतने की निर्देश हैं तो पुरानी इमारतों में भी हरसंभव उपाय किए जाने की सलाह दी गई है। सरकारी भवनों में कठिनाई मुक्त माहौल बनाया जाएगा।
सरकारी कार्यालयों वाली इमारतों के साथ निजी भवनों में भी ये प्रावधान करने होंगे, ताकि बुजुर्गों और दिव्यांगों को किसी तरह की मुाqश्कल पेश न आए। वेंâद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की इस पहल से राज्य सरकार और स्थानीय निकायों को काफी लाभ होगा। वेंâद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंवैâया नायडू ने बताया कि सामाजिक, सांस्कृतिक और र्धािमक इमारतों में भी ऐसे प्रावधान करने होंगे। नई टाउनशिप में बुजुर्गों व दिव्यांगों के आने-जाने और हर तरह के सेवाओं में इन सुविधाओं का ध्यान रख जाएगा।
कार्यालय, वाणिाqज्यक उपयोग, अस्पताल, आवासीय परिसर, हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, पर्यटन स्थल, होटल, स्टेडियम, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल, र्धािमक समारोह स्थलों के लिए वेंâद्रीय दिशा-निर्देश वैधानिक होंगे। ये दिशा-निर्देश अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से तैयार किया गया है। पुरानी इमारतों पर भी ये दिशा-निर्देश लागू होंगे। आपदाओं के समय बुजुर्गों व दिव्यांगों के बाहर निकलने के लिए रास्ते, शौचालयों के निर्माण में विशेष एहतियात के साथ एकीकृत व्यवस्था होनी चाहिए। नायडू ने कहा कि इससे संबंधित समुदाय का आत्मविश्वास बढ़ता है। इन सभी कार्य स्थलों को इंटरनेट व प्रौद्योगिकी युक्त बनाया जाएगा, जिससे दैनिक कार्यों को पूरा करने में उन्हें मदद मिलती है।
दिशानिर्देश जारी करने के बाद नायडू ने कहा कि इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस मौके पर नायडू ने शहरी विकास के आंकड़ों से तैयार एक हस्त पुाqस्तका भी जारी की, जिसे मंत्रालय ने पहली बार तैयार की गई है। नायडू ने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर नीति नियामकों को काफी मदद मिलेगी। इन आंकड़ों से भारत की बढ़ती शहरी आबादी, रोजगार सृजन, परिवहन, स्वच्छता, आवासीय सुविधा और सामाजिक व र्आिथक ाqस्थतियों की सही तस्वीर का पता चलता है।
इन आंकड़ों के मिल जाने से स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी, अमृत व हृदय जैसी योजनाओं को संचालित करने में मदद मिलती है। शहरी विकास मंत्री नायडू ने सभी लोगों से आग्र्रह किया है कि वे इसमें अपनी सलाह जरूर दें, जिससे इसमें सुधार की प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।