दिल्ली जाकर इस्तीफा सौंपेंगे, लाटसाहब


भोपाल। मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव ने अपना इस्तीफा दिल्ली जाकर सीधे राष्ट्रपति जी को सौंपने की शर्त रखी है। बुधवार को उन्होंने गृह मंत्रालय को इस्तीफा देना स्वीकार कर लिया था किन्तु सारे दिन उन्होंने इस्तीफा नहीं भेजा। जिससे सारे दिन भर दिल्ली में राष्ट्रपति भवन और गृह मंत्रालय के बीच लाट साहब के इस्तीपेâ को लेकर खोज होती रही।
० गिरफ्तारी से डरे लाटसाहब
सूत्रों के अनुसार राज्यपाल रामनरेश यादव ने अपने विधिक सलाहकारों की बात मानकर इस्तीफा नहीं दिया। विधिक सलाहकारों का कहना था कि इस्तीफा सौंपने के बाद एसटीएफ राज्यपाल को पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर सकती है। अतः इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल अज्ञातवाश में चले जाएं ताकि कुछ दिन गिरफ्तारी को टाला जा सके।
० इस्तीफा के बाद अग्रिम जमानत
विधिक विशेषज्ञों की मानें तो राज्यपाल का इस्तीफा हो जाने के बाद ही अग्रिम जमानत की याचिका न्यायालय में लगाई जा सकती है। इस्तीफा देने के बाद ही उनके वकील अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन करेंगे। तब तक राज्यपाल को गिरफ्तारी से बचाने के लिए सारे दिन उनके विधिक सलाहकार सक्रिय रहे।
० राष्ट्रपति को इस्तीफा
सूत्रों की मानें तो राज्यपाल दिल्ली जाकर राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा देकर फिर राजभवन नहीं आएंगे। इस तरह वह एसटीएफ की जद से निकलकर स्वयं तथा परिवार के सदस्यों की अग्रिम जमानत का आवेदन करेंगे।
० गृह मंत्रालय ने मांगा इस्तीफा
गृह मंत्रालय ने राज्यपाल रामनरेश यादव को इस्तीफा देने की सलाह दी थी। इसके बाद बुधवार को देर रात राष्ट्रपति से मिलने का समय राज्यपाल ने मांगा। बुधवार को दिन भर राज्यपाल के इस्तीपेâ की खबर चलती रही। इस खबर का खंडना अथवा पुष्टि किसी भी पक्ष ने नहीं की। देर रात राज्यपाल के सूत्रों से खबर आई कि वह राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें सारी स्थिति बताने के बाद इस्तीफा देंगे। इस्तीफा देने के बाद वह मप्र वापस नहीं आकर अथवा उप्र में कुछ दिनों अज्ञातवाश में रहना चाहते हैं।
० सरकार का भरोसा
सूत्रों का यह भी कहना है कि मप्र सरकार के मुखिया ने राज्यपाल को जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाने तथा उनकी पूरी मदद करने का भरोसा तथा उनकी पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया है। इसी भरोसे पर राज्यपाल ने गृह मंत्रालय के दबाव का कोई असर नहीं हुआ। मप्र में व्यापम घोटाले पर हाई प्रोफाइल लोगों के खिलाफ एफआईआर होने के बाद यह माना जा रहा है कि राज्यपाल का इस्तीफा होने के बाद मुख्यमंत्री पर इस्तीफा का दबाव कांग्रेस बनाएगी।
इस स्थिति में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वेंâद्र सरकार और भाजपा के वेंâद्रीय नेतृत्व के संपर्वâ में आकर राजनैतिक स्थितियों को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। बजट सत्र अभी चल रहा है। इस स्थिति में राज्यपाल का इस्तीफा होते ही विपक्ष अपने तेवर तीखे करेगा। इससे बचने के लिए सरकार ने राज्यपाल को ढहरो, देखों और फिर करो की सलाह देकर राज्यपाल को इस्तीफा नहीं देना चाहिए। राजधानी दिल्ली में व्यापम भोपाल और देश की राजधानी दिल्ली में व्यापमं घोटाले की गूंज और अटकलों का दौर चरम पर है। पहली बार बड़ी अनिश्चिय की स्थिति बनी हुई।