दाल संकट से उबारेगी ‘खेसारी’


नई दिल्ली ।  अब दाल की जगह खेसारी दाल लोगों की प्रोटीन आवश्यकता की पूर्ती करेगी। दरअसल देश में लंबे समय से जारी दाल संकट से वैâसे उबरा जाए इस अहम सवाल पर बहस के बीच अब प्रतिबंधित खेसारी दाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खेसारी दाल पर साठ के दशक में ही प्रतिबंध लगा था, क्योंकि उसे सेहत के लिए नुकसानदेह माना गया। लेकिन अब वैज्ञानिक खेसारी दाल की तीन ऐसी किस्में विकसित कर चुके हैं जिसके इस्तेमाल से कोई नुकसान नहीं होगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की डायरेक्टर जनरल डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने एक समाचार चैनल को बताया कि खेसारी दाल की जो नई किस्में विकसित की गई हैं उनमें पुरानी किस्मों के मुकाबले टॉकसिन्स कम हैं। अगर खेसारी दाल को पकाया जाता है तो उनमें नुकसान वाले तत्व नहीं के बराबर बचेंगे।
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो जल्द ही यह दाल देश में महंगी दाल का संकट दूर कर सकती है। डॉ स्वामीनाथन कहती हैं कि खेसारी दाल की मांग ज्यादा है क्योंकि इसमें प्रोटीन ज्यादा है। खेसारी दाल दूसरी दालों के मुकाबले काफी सस्ती होती है, इसे ऐसे इलाकों में भी उगाया जा सकता है जहां बारिश कम होती है और जहां दूसरी किस्म की दालों का उगाना संभव नहीं है। खेसारी के इस्तेमाल से गठिया और कई दूसरे रोग हो सकते हैं। इसीलिए कई दशकों से इस पर पाबंदी है। फिर भी लोग इसे चुपचाप उगाते-खाते रहे हैं। खेसारी दाल की जो ३ नई किस्में विकसित की गई हैं उन्हें ६-७ साल की रिसर्च के बाद तैयार किया गया है। इनमें नुकसानदेह तत्व नहीं के बराबर पाए गए हैं।