दस साल में विदेश भेजा गया 34 लाख करोड़ का कालाधन


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काले धन की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) को यूपीए शासनकाल में विदेश भेजे गए कालेधन की जांच का निर्देश दिया है। आरोप है कि २००४ से २०१३ के बीच मनमोहन िंसह के प्रधानमंत्री रहते भारत से ५१० अरब डॉलर (लगभग ३४.६८ लाख करोड़ रुपये) का कालाधन विदेश भेजे गए। यह खुलासा ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी (जीएफआई) ने काले धन की दुनियाभर में आवाजाही पर दिसंबर २०१५ में अपनी सालाना रिपोर्ट में किया था। अमेरिका की एजेंसी जीएफआई की इस रिपोर्ट में इसी अवधि के दौरान दुनिया भर में सात हजार अरब डॉलर की राशि गैरकानूनी तौर पर एक देश से दूसरे देश भेजी गई। एसआईटी की तरफ से पिछले हफ्ते डीआरआई को जारी निर्देश में कहा गया है कि समिति को जीएफआई की तरफ से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है कि इस अवधि के दौरान किस देश से कितनी राशि बाहर भेजी गई है। इस अवधि में औसतन हर वर्ष ५१ अरब डॉलर की राशि गैरकानूनी तौर पर भारत से बाहर भेजी गई। अब डीआरआई से इस पूरे मामले की जांच को कहा गया है। डीआरआई की रिपोर्ट आने के बाद एसआईटी उस पर आगे की कार्रवाई करेगी। हालांकि जानकारों का कहना है कि सिर्पâ भारतीय एजेंसियों के लिए ही नहीं, बाqल्क दुनिया भर की एजेंसियों के लिए जीएफआई की रिपोर्ट का सत्यापन करना बहुत बड़ी चुनौती है। जीएफआई ने मोटे अनुमानों के आधार पर इसे तैयार किया है। इसमें काला धन बाहर भेजने वाले देशों में सबसे ऊपर चीन को रखा गया है। रूस दूसरे, मौqक्सको तीसरे और भारत चौथे स्थान पर है।