तीन राज्यों के प्रमुख एयरपोर्ट का होगा विस्तार


नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब समेत कुछ राज्यों में निकट भविष्य में हवाई यातायात बढ़ने की संभावनाओं के मद्देनजर वेंâद्र सरकार ने यहां प्रमुख हवाई अड्डों के विस्तार की योजना है। इनमें लखनऊ, देहरादून, वाराणसी, चंडीगढ़, श्रीनगर और लेह एयरपोर्ट शामिल हैं। इनके अलावा जयपुर, अहमदाबाद, पुणे, विशाखापत्तनम, चेन्नई, गुवाहाटी और त्रिचुरापल्ली के हवाई अड्डों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
ये सभी एयरपोर्ट अथॉरिटी के एयरपोर्ट हैं जिसने इनका विस्तार अगले तीन वर्षों में करने की योजना बनाई है। इन पर सालाना ४,००० करोड़ रुपये के हिसाब से कुल १२,००० करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव है। अभी एयरपोर्ट अथॉरिटी हर साल अपने हवाई अड्डों के सुधार व नवीकरण पर लगभग २००० करोड़ रुपये खर्च करता है। यानी अब वह दोगुना खर्च करेगी। इन हवाई अड्डों में ज्यादातर ऐसे हैं जहां यात्रियों की संख्या में सालाना २५ फीसद की बढ़ोतरी हो रही है। आने वाले समय में इसमें और वृद्धि की संभावना है। इसे देखते हुए इनका विस्तार व आधुनिकीकरण अपरिहार्य हो गया है।
लखनऊ एयरपोर्ट के विस्तार पर ८८० करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव है। जबकि देहरादून, श्रीनगर और लेह एयरपोर्ट के विस्तार पर १००-१०० करोड़ रुपये खर्च होंगे। गुवाहाटी पर ९०० करोड़ तथा चेन्नई पर २००० करोड़ रुपये खर्च करने का इरादा है। चेन्नई एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण पर अथॉरिटी पहले ही लगभग ४००० करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। सेंटर फार एशिया-पैसिफिक एविएशन (कापा) की रिपोर्ट के अनुसार हवाई यातायात की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार को नए हवाई अड्डों के निर्माण तथा मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार पर १५ वर्षों में ४० अरब डॉलर का निवेश करना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट की नौ करोड़ यात्रियों की अधिकतम सालाना हैंडिंलग क्षमता २०२२-२३ तक भर जाएगी। लिहाजा या तो इस एयरपोर्ट का विस्तार करना पड़ेगा, या फिर नजदीक में नया एयरपोर्ट बनाना पड़ेगा। ऐसा ही कुछ चेन्नई के साथ भी होने वाला है, जिसकी १.८ करोड़ यात्री हैंडल करने की क्षमता २०१८ में पूरी हो सकती है। बेंगलुरु व हैदराबाद एयरपोर्ट भी २०२६ तक अपनी यात्री क्षमता प्राप्त कर लेंगे।
रिपोर्ट में अपर्याप्त विमानन क्षमता के कारण जिन राज्यों में गंभीर ाqस्थति पैदा होने की चेतावनी दी गई है उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश व गुजरात के नाम शामिल हैं। यहां एयरपोर्ट अथॉरिटी के ज्यादातर एयरपोर्ट अपनी क्षमता भर यातायात पहले ही प्राप्त कर चुके हैं। यही वजह है कि सरकार ने इन राज्यों के हवाई अड्डों के विस्तार को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का संकल्प जताया है।