ट्रेनें नहीं, सुविधाएं चाहते हैं 74 फीसदी लोग : सर्वे


मुंबई। करीब ६५ हजार किलोमीटर लंबी पटरियों वाला दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में एक है भारतीय रेल, जो रोजाना २ करोड़ से ज्यादा लोगों को उनकी मंजिल पर पहुंचाती है और रोजाना २५ लाख टन से ज्यादा माल ढुलाई करती है। १५० साल के इतिहास में भारतीय रेल अपनी विशालता, अपनी क्षमता और अपनी सेवा से देश की धड़कन बन चुकी है। लेकिन इस धड़कन को बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ती है बजट की। करीब तीन दशक से देश का रेलवे बजट गठबंधन सरकार के रेल मंत्रियों ने पेश किया है। कहने की जरूरत नहीं है कि उनका जोर लोकलुभावन योजनाओं के ऐलान पर ज्यादा रहा। हर बार ज्यादा से ज्यादा ट्रेन चलाने का ऐलान हुआ। लेकिन बुनियादी ढांचे और सेवाओं में सुधार की रस्मी घोषणाएं ही हुईं। जमीनी हकीकत ये है कि भारतीय रेल बुनियादी ढांचे और सेवाओं की क्वालिटी की कमी से जूझ रहा है। आए दिन होने वाले हादसे सुरक्षा पर संगीन सवाल ख़डे करते हैं। यात्री जब ट्रेनों में चढ़ते हैं तो उन्हें पता नहीं होता कि उनकी यात्रा कितनी शुभ और सुरक्षित होगी। लेकिन इस बार रेल बजट के मौके पर उम्मीदें अलग हैं, हालात अलग हैं। वजह ये है कि इस बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई सरकार रेल बजट पेश करने जा रही है। यानी न गठबंधन की मजबूरियां हैं, न लोक लुभावन घोषणाओं का दबाव। लिहाजा आम रेल यात्री रेल मंत्री से क्या चाहता है, ये जानने के लिए एक ऐजेंसी ने देश भर में १ फरवरी से १४ फरवरी तक रेल सेवाओं पर एक सर्वे किया है। सर्वे में पूछा गया कि आपको ज्यादा ट्रेन चाहिए या सुविधाएं? क्या रद्द तत्काल टिकट का भी कुछ रिफंड मिलना चाहिए? तत्काल टिकट बुक करना कितना मुश्किल है? क्या लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ-सफाई ठीक है? ट्रेनों में परोसा जाने वाला खाना कैसा है? क्या स्टेशन पर कुली ज्यादा पैसे वसूलते हैं? रिजर्वेशन कराते वक्त कौन सी बर्थ बुक कराना चाहते हैं? इन सवालों के जवाब रेल बजट की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं तो रेल मंत्री सुरेश प्रभु से क्या चाहते हैं रेल यात्री और क्या प्रभु पटरी पर रेल ला पाएंगे और कैसी होगी इस बार प्रभु की पटरी। ये जानने के लिए सर्वे में लोगों से सात सवाल पूछे गए-
पहला सवाल: आपको ज्यादा ट्रेनें चाहिए या सुविधाएं?
इस सवाल पर सर्वे में शामिल करीब ७ हजार लोगों ने जो जवाब दिया, उसके मुताबिक, ७४ फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें बेहतर सुविधाओं की ज्यादा जरूरत है, जबकि सिर्फ २० फीसदी लोगों ने ही कहा कि उन्हें नई ट्रेनें चाहिए।
दूसरा सवाल: क्या रद्द तत्काल टिकट का भी कुछ रिफंड मिलना चाहिए?
सर्वे में ७३ फीसदी लोगों ने जवाब में हां कहा है, सिर्फ १५ फीसदी लोग रिफंड नहीं चाहते हैं।
तीसरा सवाल: तत्काल टिकट बुक कराना कितना मुश्किल है?
सर्वें र्में ४० फीसदी लोगों का मानना है कि तत्काल टिकट बहुत मुश्किल है, ३१ फीसदी- मुश्किल, ११ फीसदी आसान और ८ फीसदी बहुत आसान मानते हैं।
चौथा सवाल: क्या लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ-सफाई ठीक है?
सर्वें र्में ७८ फीसदी लोगों ने जवाब ना में दिया है यानी साफ-सफाई ठीक नहीं है, जबकि ११ फीसदी लोग ही साफ-सफाई से संतुष्ट दिखे।
पांचवां सवाल: ट्रेनों में परोसा जाने वाला खाना कैसा है?
सर्वे में आधे से ज्यादा यानी ५६ फीसदी लोगों ने ट्रेनों पर मिलने वाले खाने को घटिया करार दिया है। २३ फीसदी लोग ही खाने की क्वालिटी को ठीक-ठाक कह रहे हैं। महज १३ फीसदी लोगों ने ट्रेनों में परोसे जाने वाले खाने को अच्छा बताया है।
छठवां सवाल: क्या स्टेशन पर कुली ज्यादा पैसे वसूलते हैं?
सर्वे में ६७ फीसदी से ज्यादा दर्शकों ने जवाब हां में दिया है, यानी ज्यादा पैसे वसूलते हैं कुली, सिर्फ २० फीसदी लोगों ने नहीं में जवाब दिया है।
सातवां सवाल: रिजर्वेशन कराते वक्त कौन सी बर्थ बुक कराना चाहते हैं।
सर्वे में लोअर बर्थ सबसे ज्यादा लोगों को पसंद है। ५१ फीसदी लोग लोअर बर्थ चाहते हैं। १९ फीसदी लोग साइड लोअर बर्थ चाहते हैं। तीसरे नंबर पर है अपर बर्थ, जिसे १४ फीसदी लोगों ने पसंद किया है। सबसे कम साइड अपर बर्थ पसंद की जाती है, जिसे सिर्फ ७ फीसदी लोग चाहते हैं।
संजय/संतोष-४.३०/२१ फरवरी/२०१५