जीका वायरस से लड़ने को तैयार है भारत


नई दिल्ली । उत्तर और दक्षिण अमरीका में महामारी की शक्ल आqख्तयार कर रहे ़जीका वायरस से निपटने के लिए भारत ने बड़े पैमाने पर इंत़जाम प्रारम्भ कर दिए हैं। भारतीय वेंâद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ़जीका वायरस का पता लगाने के लिए परीक्षण किट प्राप्त करने की प्रक्रिया में है। हालांकि अभी भारत में इस वायरस के नमूने नहीं मिले हैं फिर भी एहतियातन इस वायरस से लड़ने के लिए जांच हेतू परीक्षण किट तैयार की जा रही है।
़जीका वायरस की अधिक जानकारी के लिए सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोग नियंत्रण वेंâद्र (सीडीसी) के संपर्वâ में है जिससे कि इस संक्रमण से बचाव के लिए हरसंभव प्रयास किये जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ये वायरस दक्षिण और उत्तर अमरीकी महाद्वीपों के लगभग सभी क्षेत्रों में पैâल सकता है। वायरस अब तक २१ वैâरेबियाई, उत्तर और दक्षिण अमेरिकी देशों में पैâल चुका है। ब्रा़जील में अबतक लगभग ४००० बच्चे इस वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और लगभग ४० बच्चों की मौत भी हो चुकी है।
़जीका वायरस एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इस वायरस से माइक्रोसीफली नामक बीमारी होती है जिससे सिर में असामान्य छोटापन और माqस्तष्क का जन्मजात अधूरा विकास होता है। ़जीका वायरस की पहचान पहली बार १९४७ में युगांडा में हुई थी। इसका पहला मामला १९५४ में नाइजीरिया में सामने आया था। इस वायरस से पीड़ित गर्भवती महिलाओं से जन्म लेने वाले शिशुओं के माqस्तष्क का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाता। इस संक्रमण के लक्षणों में बु़खार होना, कनजांqक्टवाइटिस, सिरदर्द, आंखे लाल होना, बैचेनी, जोड़ो में दर्द होना शामिल हैं। इस वायरस का सबसे घातक पहलू यह है कि पांच में से सिर्पâ एक मरीज को ही संक्रमण के बारे में पता चल पाता है यानि लगभग ८० प्रतिशत लोगों में किसी भी खास प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते, जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं के लिए यह जानना कठिन होता है कि वे इस वायरस से संक्रमित हैं या नहीं।