जवाहर बाग के अवैध कब्जाधारियों के खतरों से अनभिज्ञ रही मथुरा पुलिस : रिपोर्ट


नईदिल्ली। मथुरा िंहसा के संबंध में राज्य सरकार ने कहा है कि पुलिस जवाहर बाग से अनाधिकृत कब्जाधारियों को हटाये जाने की कार्यवाही के खतरों का सही अंदाजा नही लगा पाई थी वेंâद्रीय गृह मंत्री राजनाथ िंसह को भेजी रिपोर्ट में अखिलेश यादव सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अतिक्रमणकारियों को कोई राजनीतिक संरक्षण प्राप्त नहीं था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया, कि राज्य सरकार ने वेंâद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें पुलिस खुद मान रही है कि बिना किसी तैयारी के (अतिक्रमणकारियों के खिलाफ) कार्रवाई की गई, जिस कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ा। हम इस बात का आकलन नहीं कर सके कि अंदर कितने लोग हैं, इसलिए पुलिस की लापरवाही तो सा़फ है। वैसे जवाहर बाग में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ पिछले हफ्ते की पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई िंहसा को वेंâद्र सरकार सीधे राज्य सरकार की नाकामी बता रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस मामले में सीधे शिवपाल िंसह यादव से इस्तीफा मांग चुके हैं। इस मामले में सरकार अब सीबीआई जांच का मन बना रही है। उधर, बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है, जिस पर मंगलवार को सुनवाई संभव है। इस बीच, जवाहर बाग की घटना को लेकर कई सवाल उठाए रहे हैं, जैसे क्या यह बस स्थानीय पुलिस के अंदाजे की चूक है या फिर उसे तैयारी से पहले ही कार्रवाई के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा इन अतिक्रमणकारियों के पास इतनी भारी मात्रा में असलाह-बारूद की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस समूह का नाqक्सलयों के साथ संबंध की ओर इशारा किया गया है, तो विपक्षी दल इसमें राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगा रहे हैं।