जयपुर साहित्य महोत्सव में भारत-पाक रिश्तों पर चर्चा


जयपुर। यहां चल रहे जयपुर लिटरेचर पेâस्टिवल में जब पूर्व राजनयिक जी. पार्थसारथी, पूर्व पाक विदेश मंत्री खुर्शीद मेहमूद कसूरी और पाकिस्तानी पत्रकार अहमद रशीद एक मंच पर बैठे तो साहित्य की बजाया भारत-पाक रिश्तों पर चर्चा छिड़ गई।
पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त रह चुके जी. पार्थसारथी का कहना था कि गोलियों की आवाजों के बीच शांति की आवाज नहीं उठायी जा सकती, जबकि लड़ाके से पत्रकार बने अहमद रशीद का कथन था कि जंग और संघर्ष के दौरान की गयी बातचीत ही सफल होती है। रशीद की दलील थी कि जब पुतिन भी ओबामा से चर्चा कर सकते हैं तो भारत-पाकिस्तान क्यों नहीं कर सकते। पार्थसारथी ने कहा कि यदि पाकिस्तान उसकी २००३ की नीति पर अमल करे जब उसने यूद्धविराम की घोषणा की थी और सात साल तक उस पर कायम रहा था, तो दोनों देशों के बीच वार्ता संभव हो सकती है। पार्थसारथी ने कहा कि जब गोलियां चल रही हों तो शांति वार्ता की आवाज सुनाई नहीं देती। उन्होंने आगे कहा कि इस्लामाबाद को जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार चरमपंथियों को नहीं भेजना चाहिए। पूर्व पाक विदेश मंत्री खुर्शीद मेहमूद कसूरी ने कहा कि दोनों देशों को बातचीत बंद नहीं करनी चाहिए। नरेन्द्र मोदी विकास के आधार पर सत्ता में आए हैं, यदि यह केवल एजेंडा ही है दोनों देशों के लिए तो किसी के पास कोई विकल्प नहीं है।