चेन्नई में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएॅ


नई दिल्ली। सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिए सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं। यूएन हैबिटेट और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सड़क दुर्घटनाओं का औसत दुनिया में ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई का सड़क दुर्घटनाओं में दूसरा स्थान है। इसके बाद जयपुर दिल्ली और इंदौर का नंबर आता है। चेन्नई में प्रति एक लाख लोगों में सड़क हादसों में मारे जाने वाली की संख्या करीब २७ है।
रिपोर्ट के मुताबिक जयपुर चौथे, इंदौर १६वें, कोलकाता दिल्ली बेंगलूरु २३ वें, २४वें और २५वें स्थान पर है। मुंबई को ४०वें स्थान पर रखा गया है। रिपोर्ट में ये कहा गया है कि सड़क सुरक्षा अभियान और कुछ कठोर कार्रवाई के द्वारा इन हादसों पर लगाम लगाया जा सकता है।
यूएन हैबिटेट के मुताबिक सुधारात्मक उपायों के द्वारा चेन्नई, स्टॉकहोम (स्वीडेन) की तरह हो सकता है। स्वीडेन में एक लाख में जान गंवानों वालों की संख्या महज ०.७ है, जिसे शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक जैसे जैसे र्आिथक गतिविधियों में इजाफा होगा सड़कों पर गाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। दुनिया के ज्यादातर शहरों में सड़क दुर्घटना के शिकार साइकिल चलाने वाले और पैदल चलने वाले होते हैं जिनकी संख्या करीब २६ फीसद है लेकिन कुछ शहरों में ये आंकड़ा ७० फीसद के पास है। भारतीय शहरों में ये आंकड़े डराने वाले हैं। भारतीय शहरों की सड़कों पर करीब ४४ फीसद साइकिल सवार, मोटरसाइकिल सवार और पैदल चलने वाले सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं जबकि ये आंकड़ा मुंबई में करीब ६० फीसद है।
भारत में सड़क हादसों में मारे जाने वालों में १५-३५ आयु वर्ग के युवकों की संख्या सबसे ज्यादा है। २०१४ के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ७५ हजार से ज्यादा लोगों की जान गई है। ये अनुमान लगाया गया है कि आने वाले २० सालों में गाड़ियों की संख्या करीब पूरे विश्व में करीब १.६ बिलियन होगी जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी एशियाई मुल्कों खासतौर से चीन और भारत की होगी। जबकि २०१२ में ये संख्या ६३ मिलियन थी।