चिदंबरम ने हटवाया हलफनामे से इशरतजहां का लश्कर िंलकः पिल्लई


-लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने संबंधी हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामा बदला गया
नईदिल्ली। पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले में एक और बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि २००९ में तत्कालीन वेंâद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस केस में वेंâद्र सरकार का हलफनामा बदलवाया था, ताकि इशरत के लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्शन की बात सामने ही न आए। पिल्लई यूपीए सरकार के दौरान गृह सचिव थे। सूत्रों के मुताबिक पिल्लई ने बताया, कि तत्कालीन गृह मंत्री चिदंबरम ने ज्वॉइंट सेव्रेâटरी से इशरत जहां केस की फाइल मंगवाई थी और कहा था कि हलफनामे में बदलाव की जरूरत है। पिल्लई ने दावा कि हलफनामे में बदलाव के बाद ही केस की फाइल उनके पास आई थी। बतौर पिल्लई, पहले इस केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया था, उसमें इशरत और उसके तीन साथियों जावेद शेख उफ प्रणेश पिल्लई, जीशना जौहर और अमजद अली राणा को लश्कर के स्लीपर सेल का सदस्य बताया था। इस हलफनामे को कोर्ट में गृह मंत्रालय ने दायर किया था। पिल्लई के दावे पर चिदंबरम की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। पिल्लई ने हाल में यह भी दावा किया था कि इशरत जहां और उसके साथियों के तार लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने के बाबत २००९ में गुजरात हाई कोर्ट में दाखिल किया गया हलफनामा राजनीतिक स्तर पर बदलवाया गया था। गौरतलब है कि इशरत और उसके साथी २००४ में हुई एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए थे। पूर्व गृह सचिव से जब पूछा गया कि क्या हलफनामा राजनीतिक स्तर पर बदलवाया गया, इस पर उन्होंने कहा, मैं नहीं जानता क्योंकि यह मेरे स्तर पर नहीं किया गया। मैं कहूंगा कि यह राजनीतिक स्तर पर किया गया। तत्कालीन यूपीए सरकार ने २००९ में दो महीने के भीतर दो हलफनामे दाखिल किए थे। एक में कहा गया था कि कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए चार लोग आतंकवादी थे जबकि दूसरे में कहा गया था कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने लायक सबूत नहीं हैं।