चतुर्वेदी ने खोला केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा


नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने की वजह से चर्चा में आए एम्स के फॉर्मर चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी ने दिल्ली सेंट्रल ऐडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइब्यूनल में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार उनके काडर में बदलाव की राह में गैरकानूनी रुकावट डाल रही है। इस याचिका पर आज सुनवाई होगी। चतुर्वेदी इंडियन फॉरेस्ट र्सिवस के हरियाणा काडर के अधिकारी हैं।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार चतुर्वेदी को ऐंटि-करप्शन ब्यूरो का हेड बनाना चाहती है। चतुर्वेदी ने आठ अक्टूबर २०१२ को अपना काडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड करने का आवेदन दिया था। उन्होंने आरोप लगाया है कि एम्स में ‘ताकतवर भ्रष्ट अधिकारियों’ के कारनामों का खुलासा करने की वजह से वेंâद्र सरकार काडर बदलने के उनके आवेदन को ‘दुर्भावनापूर्ण और मनमाने’ तरीके से रोककर उन्हें सजा दे रही है।
इस याचिका की कॉपी ईटी ने देखी है। चतुर्वेदी ने कहा है कि एम्स में प्रभावशाली भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उनकी ओर से की गई कार्रवाई के कारण वेंâद्र सरकार उनके करियर की संभावनाओं में रुकावट पैदा कर रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने ‘निहित स्वार्थों के दबाव’ में उन्हें परेशान किया और अचानक पद से हटा दिया।
चतुर्वेदी को पिछले वर्ष अगस्त में एम्स के सीवीओ के पद से हटाया गया था। तत्कालीन स्वास्थय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि चतुर्वेदी को इस वजह से हटाया गया क्योंकि वह इस पद पर नियुक्ति के मानक पूरा नहीं कर रहे थे। चतुर्वेदी ने अपने कार्यकाल के दौरान लगभग २०० मामलों में कार्रवाई की थी और इनमें से ७८ मामलों में सजा दी गई, ८७ मामलों में डिपार्टमेंटल चार्जशीट जारी की गई और लगभग २० मामले सीबीआई के पास भेजे गए थे।