गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के जरिये आया 900 किलो सोना


नई दिल्ली। मोदी सरकार की गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगी है। इसके जरिये अब तक ९०० किलो सोना सरकार घरों और मंदिरों से निकालने में सफल रही है। र्आिथक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्कीम में जमा होने वाले सोने की मात्रा भविष्य में और बढ़ेगी।
मंदिरों और घरों में पड़े सोने को उत्पादक निवेश में तब्दील करने वाली इस स्कीम को लेकर शुरुआत में लोगों ने ठंडा रुख दिखाया था। हालांकि, बाद में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम को अधिक आकर्षक और सुविधानजक बनाया गया, ताकि इसमें उन लोगों को प्रोत्साहित किया जा सके जिनके पास सोना बेकार पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में ऐसे सोने की मात्रा २० हजार टन से ज्यादा है। इसे मंदिरों और घरों से निकाला जा सका तो सोने के आयात पर विदेशी मुद्रा भी कम खर्च करनी पड़ेगी।
गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम बीते साल पांच नवंबर को शुरू की गई थी। इसके तहत बैंकों को १५ साल तक के लिए सोना जुटाने की खातिर अधिकृत किया गया था। इस सोने को वे नीलाम कर सकते हैं या ज्वेलर्स को उधार दे सकते हैं। इस स्कीम में सोना जमा करने वालों को ढाई फीसद सालाना रिटर्न देने का इंतजाम किया गया। वैसे, यह रिटर्न दर बैंकों के बचत खाते की ब्याज दर से भी कम है।
फिलहाल इस स्कीम के लिए देश भर में ४६ एसेइंग और हॉलमाा\कग सेंटर सोना जमा करने और उसकी शुद्धता परखने के लिए अधिकृत किए गए हैं। इन्हें स्कीम के तहत सोने के लिए कलेक्शन एंड प्योरिटी टेिंस्टग सेंटर (सीपीटीसी) के रूप में जाना जाएगा। बैंक भी बड़े जमाकर्ताओं से अपनी अधिकृत ब्रांचों के जरिये सोने के डिपॉजिट स्वीकार कर सकते हैं।
भारत हर साल लगभग १,००० टन सोना आयात करता है। कच्चे तेल के बाद देश के आयात बिल में सोना ही आयात की सबसे बड़ी मद है। चालू वित्त वर्ष २०१५-१६ में अप्रैल से दिसंबर के दौरान सोने का आयात बढ़कर २६.४५ अरब डॉलर हो गया। बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में २५.८५ अरब डॉलर का सोना आयात हुआ था।