’’गंगा स्वच्छता-ग्रामीण सहभागिता’’ सम्मेलन 30 को


नई दिल्ली। गंगा की सफाई के लिए प्रयासरत मोदी सरकार ने अब इस अहम काम में नदी के किनारे बसे गांवों के प्रधानों की भी मदद लेने का पैâसला किया है। प्रदूषण के स्तर को कम करने के मकसद से सरकार गंगा किनारे बसे सभी १,६५७ गांवों के प्रधानों के साथ अगले हफ्ते चर्चा करेगी। इसको लेकर ’’गंगा स्वच्छता-ग्रामीण सहभागिता’’ सम्मेलन ३० जनवरी को आयोजित होगा। दिन भर चलने वाले इस सम्मेलन में वेंâद्रीय जल संसाधन मंत्रालय गंगा ग्राम कार्यक्रम के तहत विविध जल प्रबंधन मॉडलों को साझा करेगा। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों के अलावा वेंâद्रीय मंत्री उमा भारती, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, बीरेंद्र िंसह और महेश शर्मा भी भाग लेंगे। इन नेताओं के अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पाqश्चम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है। इन पांच राज्यों से होकर गंगा बहती है। उल्लेखनीय है कि इस महीने के शुरू में जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने गंगा ग्राम पहल की शुरुआत की थी। इसका मकसद गंगा में बहने वाले सीवेज का शोधन करके नदी में प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने का है। एक सूत्र ने बताया, ’’हम सम्मेलन में पंचायत प्रमुखों के साथ जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मसलों को साझा करेंगे। हम चार-पांच मॉडल भी पेश करेंगे।’’ गंगा ग्राम कार्यक्रम के तहत, गांवों में बहने वाली खुली नालियों का प्रबंध किया जाएगा। प्रत्येक गांव में शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए सरकार प्रत्येक गांव पर एक करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस कार्यक्रम के पहले चरण में २०० गांवों को कवर किया जाएगा।