कोल इंडिया श्रमिकों की हड़ताल खत्म


– सरकार ने सीआईएल के निजीकरण नहीं करने का दिया आश्वासन
नईदिल्ली। देशभर में दो दिनों से चल रही कोयला कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई। सरकार ने श्रमिक संगठनों को आश्वासन दिया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) का निजीकरण नहीं किया जाएगा और कर्मचारियों के हितों का संरक्षण किया जाएगा। हड़ताल के दूसरे दिन ३०० करोड़ रुपए के उत्पादन के नुकसान का अनुमान है। हड़ताल से ७५ प्रतिशत से अधिक उत्पादन ठप रहा। ताप बिजली घरों में कोयला खत्म होने की ाqस्थति में बिजली संकट पैदा होने की आशंका भी बढ़ गयी थी।
कोल इंडिया के कर्मचारियों सहित देशभर में करीब पांच लाख कामगार कल से कोयला खानों में कामकाज से दूरी बनाये हुए थे। भाजपा से जुड़े भारतीय मजदूर संघ समेत पांच बड़े श्रमिक संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया था जो चार दशकों में सबसे बड़ी औद्योगिक हड़ताल बताई जाती है। कोयला और उर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रेड यूनियनों के नेताओं के साथ छह घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन बैठक के बाद कहा कि सीआईएल के निजीकरण का कोई इरादा नहीं है। वर्तमान में और भविष्य में सीआईएल के कर्मचारियों के हितों को किसी भी तरह प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। सीआईएल का स्वामित्व या प्रबंधन निजी हाथों में जाने को लेकर किसी तरह की आशंका की जरूरत नहीं है।
सीआईएल के अध्यक्ष सुतीर्थ भट्टाचार्य ने भी कहा कि हड़ताल तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गई है। सीआईएल देश की जरूरत का करीब ८० प्रतिशत कोयला उत्पादन करती है। गोयल ने यूनियन नेताओं को आश्वासन दिया कि सरकार उनकी िंचताओं पर ध्यान देगी और एक संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन करेगी, जिसमें सभी पांचों ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि और सीआईएल तथा िंसगरेनी कोलियरीज वंâपनी लिमिटेड के अधिकारी होंगे। गोयल के आश्वासन के बाद पांच दिन के लिए शुरू की गई हड़ताल दूसरे दिन समाप्त हो गई। बैठक के बाद एटक नेता लखन लाल महतो ने कहा कि हड़ताल वापस ले ली गई है। इंडियन नेशनल माइनवर्वâर्स पेâडरेशन के अध्यक्ष राजेंद्र िंसह ने भी पुाqष्ट की कि हड़ताल समाप्त हो गई है।