केजरीवाल ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया : शत्रुघ्न सिन्हा


० दिल्ली चुनाव में हार-जीत भी कप्तान की होगी
नईदिल्ली। अगर दिल्ली में भाजपा हारती है तो क्या यह प्रधानमंत्री मोदी की हार होगी? पार्टी के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि अरिंवद केजरीवाल ने अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। उन्होंने कहा कि यकीनन उन्होंने अपनी ताकत का अहसासा कराया है। ऐसा न होता तो उनके चर्चे न हो रहे होते, वह टीवी पर छाए न होते। उन्होंने माहौल को एकदम गर्म कर दिया है। सिन्हा ने कहा कि हार-जीत कप्तान की होती है। शत्रुघ्न सिन्हा पार्टी के प्रचार और नीतियों को लेकर ज्यादा खुश नहीं हैं। उन्हें लगता है कि हर्षवर्धन को बतौर नेता उतारा जाता तो अच्छा होता। दिल्ली चुनाव में कई सर्वेक्षण बीजेपी की हार का अनुमान लगा रहे हैं। तभी से पार्टी नेता पीएम नरेंद्र मोदी के बचाव में बयानबाजी कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने तो साफ कह दिया कि दिल्ली चुनाव प्रधानमंत्री पद का चुनाव नहीं और इसे मोदी सरकार पर जनमत संग्रह न माना जाए। यही बात १ दिन पहले पूर्व बीजेपी अध्यक्ष वेंवैâया नायडु भी कह चुके हैं। लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा ने इस बात को खरे शब्दों में कहा है। उन्होंने कहा कि देश में हर तरफ आज हमारे नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता है। वह देश की इच्छा के प्रतीक हैं। वह डैिंशग हैं, विजनरी हैं, दबंग हैं, चारों तरफ उनका बोलबाला है। अब जब वह सामने आ गए हैं तो जाहिर है कि जनमत संग्रह माना जाए या न माना जाए, लेकिन जहां भी वह होंगे तो जाहिर है कि सबसे पहले निगाह उन्हीं पर जाएगी क्योंकि कप्तान हैं वह। हां, यह भी सही है कि दिल्ली का चुनाव है, मुख्यमंत्री का चुनाव है। जब शत्रुघ्न सिन्हा से पूछा गया कि बीजेपी ने नेगेटिव पॉलिटिक्स का सहारा लिया तो भी पूर्व वेंâद्रीय मंत्री ने अपनी पार्टी का बचाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि मैं अपनी पार्टी के बारे तो नहीं कहूंगा लेकिन जो इन दिनों हुआ है, वह सही नहीं हुआ है, नेगेटिव पॉलिटिक्स ठीक नहीं है। फर्जी पंâिंडग के आरोप लगाना, जवाब आ जाना कि गिरफ्तार कर लो, इस तरह का कटुता भरा माहौल ठीक नहीं है। हमारा विरोधी हमारा दुश्मन नहीं है। अगर वे चुनाव लड़ रहे हैं तो हमारी शुभकामनाएं हैं। सिन्हा ने माना कि किरन बेदी को लेकर पार्टी में नाराजगी है और हर्षवर्धन को उतारा जाता तो भाजपा को फायदा होता। उन्होंने कहा कि दबी जुबान से हम भी ऐसी बातें सुनते हैं किरन बेदी को लेकर पार्टी में नाराजगी है। हर्षवर्धन होते तो अच्छा होता, उनका ट्रैक रिकॉर्ड भी अच्छा है। लेकिन पार्टी का पैâसला अगर पार्लमेंट्री बोर्ड के जरिए होता और पैâसले पर ठप्पा लग जाता तो अच्छा होता। लेकिन अब उतार दिया है तो हम उसकी सराहना करते हैं। चुनाव के नतीजे के बाद कार्यकर्ताओं की नाराजगी पर विचार होगा और जो भी डैमेज वंâट्रोल हुआ उसे ठीक करने की कोशिश होगी।