केंद्र के खिलाफ किसान संगठनों ने खोला मोर्चा, 7 से देशव्यापी प्रदर्शन


नई दिल्ली (ईएमएस)। मौजूदा बजट में की गई फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य संबंधी घोषणा से किसान संगठनों नाराज है। एमएसपी के गलत आकलन से नाराज किसान संगठनों ने सरकार को चेताने के लिए अब सात फरवरी से देशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, जो हफ्ते भर जारी रहेगा। किसान संगठनों का आरोप है की केंद्र सरकार ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को सामने रख कर किसानों को लुभाने के लिए उनकी आमदनी बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना करने की बात तो की है, लेकिन ये सब कागजी है। किसान संगठन चाहते हैं की सरकार एमएसपी तय करते समय सब्सिडी को लागत से ना घटाए। भारतीय किसान यूनियन के सचिव डॉ सुदर्शन पाल के मुताबिक सरकार द्वारा तय की गई एमएसपी किसान की खेती की लागत का डेढ़ गुना तो दूर उसकी असली लागत भी नहीं दिला पाएगी। इसलिए एमएसपी का निर्धारण सही हो और उसके लिए अलग से कोई फंड का प्रावधान हो। राष्ट्रीय खेत मजदूर संगठन के अध्यक्ष डॉक्टर सुनीलम के मुताबिक बीजेपी सरकार ने बजट में मार्केट सपोर्ट प्राइस यानी एमएसपी की बात तो जरूर की है लेकिन उसके लिए कोई भी बजट का प्रावधान नहीं किया है। उनका मानना है कि सरकार एमएसपी की बात तो करती है लेकिन इस बात की गारंटी नहीं देती कि हर हाल में किसान की उपज खरीदी जाएगी। मजदूर संगठन मांग कर रहे हैं कि सरकार उपज ना खरीदने वाले एजेंटों पर नकेल कसे और उन पर जुर्माना हो। 4 साल में किसानों की आमदनी गिरी, आखिरी साल कौन सा करिश्मा होगा। इस साल के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाएं लुभावनी जरूर हो सकती हैं क्योंकि यह सभी घोषणाएं वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव को सामने रखकर की गई हैं, लेकिन हकीकत में किसानों की आमदनी बढ़ाना एक ख्याली पुलाव हो सकता है। किसान संगठनों ने बजट को गोलमोल बताया है। किसान मुक्ति संगठन के अध्यक्ष वी एम सिंह के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एमएसपी को कुचलने का काम किया है, जो किसानों के साथ एक खिलवाड़ है। दरअसल केंद्र सरकार बजट में एमएसपी का जिक्र करके फंस गई है। किसान संगठन आरोप लगा रहे हैं की पिछले चार वर्षों में देश में 16 हजार से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं और किसानों की आमदनी बढ़ने की बजाए कम हुई है।
– पंजाब सहित कई राज्यों में प्रदर्शन
पिछले 4 वर्षों में किसानों की हालत पतली हो गई है। नाराज किसान संगठनों ने अब 7 फरवरी से देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला लिया है। 199 किसान संगठन 6 फरवरी को दिल्ली में जुटेंगे और हफ्ते भर चलने वाले धरना प्रदर्शनों की रूपरेखा तय करेंगे। पंजाब के कई किसान संगठनों ने 7 फरवरी को राज्य भर में 2 घंटे ‘रेल और परिवहन रोको’ प्रदर्शन करने का फैसला किया है। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर की गई कृषि सेक्टर की घोषणाएं किसानों के गले नहीं उतर रही हैं। किसान चाहते हैं कि खेती से जुड़ी सभी घोषणाएं महज कागजी ना होकर व्यावहारिक हों और उनका शोषण रुके।
– ये है दलील
1. सरकार का खेती की लागत तय करने का तरीका गलत है क्योंकि वह किसान यानी परिवार के मुखिया को छोड़ कर उसके परिवार को अकुशल मजदूर मानती है, जबकि किसान का पूरा परिवार खेती करता है। इसलिए पूरे परिवार को स्किल्ड यानी कुशल मजदूर माना जाए।
2. खेती की लागत तय करते वक्त जमीन का किराया भी जोड़ा जाए क्योंकि किसानों का एक बड़ा वर्ग खेत किराए पर ले कर खेती करता है।
3. सरकार किसानों को सब्सिडी के नाम पर कुछ रियायतें तो देती है लेकिन खेती की लागत तय करते समय सब्सिडी घटा देती है।